उत्साह के साथ मना विश्व आदिवासी दिवस,
सूरजपुर। जिला मुख्यालय में विश्व आदिवासी दिवस बड़े ही हर्षोल्लास वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत आदिवासी परंपरा के अनुरूप प्रकृति पूजा-अर्चना से हुई, जिसे स्थानीय बैगा, भूमका एवं समाज प्रमुखों द्वारा विधिवत संपन्न कराया गया। यह आयोजन आदिवासी समाज की सांस्कृतिक अस्मिता एवं प्रकृति आधारित जीवन दर्शन का प्रतीक रहा।
कार्यक्रम के दौरान भारतीय संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन किया गया, जिसने समानता, न्याय, स्वतंत्रता एवं बंधुत्व के मूल्यों के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सोशल एक्टिविस्ट एवं सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग के जिला अध्यक्ष बीपीएस पोया ने विश्व आदिवासी दिवस के ऐतिहासिक एवं वैश्विक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 9 अगस्त 1982 को जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के कार्यसमूह की पहली बैठक हुई थी तथा 1994 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा इसकी घोषणा के पश्चात वर्ष 1995 से यह दिवस प्रतिवर्ष मनाया जा रहा है। उन्होंने वर्ष 2026 की थीम “आदिवासी पारंपरिक दाइयों का सम्मान: जीवन और स्वास्थ्य की सुरक्षा” पर भी विस्तार से जानकारी दी। पोया ने डॉ. जयपाल सिंह मुंडा एवं उनके साथ आदिवासी प्रतिनिधि करने वाले सदस्यों ने भारत के संविधान में अधिकारों को सुनिश्चित किया। आज आदिवासी सभी बनना चाहते हैं परन्तु आदिवासीयत पर कोई जीना नहीं चाहता उन्होंने अपिल किया कि प्रकृति और मानव के बीच अटूट प्रेम हैं जिसे हमें सीखना जानना समझना और समझाना होगा ।अपने संबोधन में उन्होंने भारतीय संविधान में प्रदत्त आदिवासी समुदाय के अधिकारों पर विशेष बल देते हुए अनुच्छेद 46, 244(1), 275(1), 338A, पांचवीं अनुसूची, पेसा अधिनियम 1996 एवं वन अधिकार अधिनियम 2006 जैसे प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता बताई। साथ ही संयुक्त राष्ट्र के आदिवासी अधिकार घोषणा पत्र (UNDRIP 2007) का उल्लेख करते हुए जल, जंगल,
जमीन पर पारंपरिक अधिकारों की सुरक्षा एवं स्वशासन की अवधारणा को सुदृढ़ करने की बात कही।उन्होंने आदिवासी समाज के समक्ष वर्तमान चुनौतियों—भूमि संरक्षण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, रोजगार सृजन, फर्जी जाति प्रमाण पत्र की रोकथाम, बैकलॉग भर्ती, स्थानीय युवाओं की भागीदारी, पेसा एवं वन अधिकार कानून का प्रभावी क्रियान्वयन, परिसीमन में उचित प्रतिनिधित्व एवं पृथक आदिवासी धर्म कोड—जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। साथ ही सरगुजा संभाग में विधि (लॉ) महाविद्यालय की सीटें बढ़ाने एवं युवाओं के लिए प्रशिक्षण कार्यशालाओं के आयोजन की मांग भी रखी।कार्यक्रम में समस्त अतिथियों ने आदिवासी एवं संविधानिक पर प्रकाश डाला ।
कार्यक्रम में मेधावी छात्र-छात्राओं, युवाओं, किसानों, महिलाओं, कलाकारों एवं जनप्रतिनिधियों को प्रशस्ति पत्र, गमछा एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। आदिनिवास छत्तीसगढ़ टीम द्वारा लकी ड्रा के माध्यम से युवाओं को प्रोत्साहित किया गया, जो समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने वाला पहल रहा।सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बच्चों एवं स्थानीय कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य एवं संगीत की आकर्षक प्रस्तुतियां दीं।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में सर्व आदिवासी समाज के आयोजन समिति अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी, कर्मचारी, समाजसेवी, छात्र-छात्राएं एवं महिलाएं उपस्थित रहे।










