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Bureau Report
बारिश में जलभराव से बढ़ी परेशानी, रेलवे और एसईसीएल की उदासीनता पड़ रही भारी
बिश्रामपुर। एनएच-43 से महज कुछ दूरी पर स्थित बिश्रामपुर रेलवे स्टेशन का पहुंच मार्ग इन दिनों बदहाली की तस्वीर पेश कर रहा है। सड़क पर जगह-जगह 50 से अधिक बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। बारिश के बाद इन गड्ढों में पानी भर जाने से पैदल यात्रियों के साथ दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। महत्वपूर्ण स्टेशन होने के बावजूद लंबे समय से सड़क की मरम्मत नहीं होने से यात्रियों में नाराजगी बढ़ रही है।बिश्रामपुर रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री आवागमन करते हैं। वहीं क्षेत्र के इकलौते गुड्स शेड होने के कारण भारी वाहनों की आवाजाही भी इसी मार्ग से होती है। माल परिवहन और यात्री ट्रेनों से रेलवे को प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये का राजस्व मिलने के बावजूद स्टेशन तक पहुंचने वाली सड़क की हालत सुधारने की दिशा में ठोस पहल नहीं होने पर सवाल उठ रहे हैं।
गिट्टी डालकर छोड़ दिया मार्ग
बताया जाता है कि करीब एक वर्ष पहले लगभग 15 करोड़ रुपये की लागत से बिश्रामपुर गुड्स शेड में विभिन्न विकास
कार्य कराए गए थे। इसके बावजूद गुड्स शेड से एनएच-43 तक पक्की सड़क का निर्माण नहीं कराया गया। बारिश में कीचड़ से बचने के लिए सड़क पर क्रेशर की गिट्टी डालकर रोलर चला दिया गया था। इसका खामियाजा अब यात्रियों और स्थानीय लोगों को भुगतना पड़ रहा है। सामान्य मौसम में जहां गिट्टी के कारण धूल के गुबार उड़ते हैं, वहीं बारिश में सड़क गड्ढों और कीचड़ में तब्दील हो जाती है।
कार्य कराए गए थे। इसके बावजूद गुड्स शेड से एनएच-43 तक पक्की सड़क का निर्माण नहीं कराया गया। बारिश में कीचड़ से बचने के लिए सड़क पर क्रेशर की गिट्टी डालकर रोलर चला दिया गया था। इसका खामियाजा अब यात्रियों और स्थानीय लोगों को भुगतना पड़ रहा है। सामान्य मौसम में जहां गिट्टी के कारण धूल के गुबार उड़ते हैं, वहीं बारिश में सड़क गड्ढों और कीचड़ में तब्दील हो जाती है।25 लाख के प्रस्ताव पर भी नहीं बनी बात
स्टेशन पहुंच मार्ग के नवीनीकरण को लेकर ग्राम पंचायत कुंजनगर द्वारा एसईसीएल बिश्रामपुर प्रबंधन को सीएसआर मद से सड़क, नाली और स्टेशन चौक निर्माण कराने का प्रस्ताव दिया गया था। तत्कालीन सरपंच के पत्र के बाद महाप्रबंधक ने सिविल विभाग को इस्टीमेट तैयार करने तथा जिला प्रशासन से एनओसी लेने के निर्देश दिए थे।
जानकारी के अनुसार करीब 25 लाख रुपये के कार्य का इस्टीमेट तैयार कर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद
प्रस्ताव स्वीकृति के लिए एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर भेजा गया। लेकिन अलग-अलग कारणों से फाइल वापस किए जाने का सिलसिला चलता रहा। अंततः सिविल विभाग ने आगे की कार्रवाई रोक दी।
प्रस्ताव स्वीकृति के लिए एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर भेजा गया। लेकिन अलग-अलग कारणों से फाइल वापस किए जाने का सिलसिला चलता रहा। अंततः सिविल विभाग ने आगे की कार्रवाई रोक दी।रोजाना सैकड़ों लोग होते हैं परेशान
एनएच-43 के ठीक किनारे स्थित होने के कारण बिश्रामपुर रेलवे स्टेशन का सरगुजा संभाग में खास महत्व है। आसपास के सैकड़ों गांवों के लोग प्रतिदिन ट्रेन पकड़ने यहां पहुंचते हैं। इसके अलावा गुड्स शेड के कारण बड़ी संख्या में मालवाहक वाहन भी इसी सड़क से गुजरते हैं। भारी वाहनों की लगातार आवाजाही के कारण सड़क की स्थिति और खराब होती जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में एसईसीएल का क्षेत्रीय मुख्यालय और बड़ी कोयला खदानें होने के बावजूद स्टेशन तक पहुंचने वाली सड़क जैसी मूलभूत सुविधा की अनदेखी दुर्भाग्यपूर्ण है। लोगों ने कलेक्टर सूरजपुर से मामले में हस्तक्षेप कर रेलवे और एसईसीएल प्रबंधन से समन्वय स्थापित करते हुए सड़क का स्थायी निर्माण कराने की मांग की है।










