अम्बिकापुर। अम्बिकापुर शहर में निजी विद्यालयों द्वारा अभिभावकों पर महंगी किताबों, कॉपियों और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए दबाव डालने
की शिकायतों के मद्देनजर जिला शिक्षा अधिकारी श्री दिनेश कुमार झा की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में लगभग सभी प्रमुख निजी विद्यालयों के प्राचार्य, शिक्षक और प्रबंधन प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
बैठक में यह सामने आया कि कई निजी विद्यालय एक निश्चित पुस्तक विक्रेता या दुकान के माध्यम से रेफरल और पूरक पुस्तकें, कॉपियाँ और यूनिफॉर्म बेचने के लिए अभिभावकों को मजबूर कर रहे हैं। इस प्रक्रिया में निजी प्रकाशकों और स्थानीय दुकानदारों के साथ सांठगांठ कर भारी मुनाफा कमाया जा रहा था। कक्षा 1 से 8वीं तक की किताबों की कीमत एन.सी.ई.आर.टी की किताबों के मुकाबले 10 गुना तक अधिक थी।
आनंद के.एस. सिसोदिया (होली क्रॉस कान्वेंट) ने बताया कि उनकी संस्था किसी विशेष दुकान पर दबाव नहीं डालती, लेकिन जांच में पाया गया कि अधिकांश विद्यालयों ने सूचीबद्ध किताबें निश्चित दुकानों से खरीदने के लिए अभिभावकों पर दबाव डाला। मनोज कर्माकर (बिरला ओपन माइंड अंतर्राष्ट्रीय विद्यालय) ने भी स्वीकार किया कि अम्बिकापुर के स्कूल वर्ल्ड, व अन्य दुकानों से ही किताबें खरीदी जा रही हैं।
जिला शिक्षा अधिकारी ने बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए:
सभी निजी विद्यालयों में एन.सी.ई.आर.टी./सी.बी.एस.ई./एस.सी.ई.आर.टी. की किताबों का उपयोग अनिवार्य होगा।
सभी अभिभावकों को यह स्वतंत्रता होगी कि वे किसी भी दुकान से किताबें और कॉपियाँ खरीद सकते हैं।
दिनांक 13 अप्रैल 2026 तक पालक-शिक्षक बैठक अनिवार्य रूप से आयोजित की जाएगी और इसमें यह जानकारी सार्वजनिक रूप से दी जाएगी।
रेफरल/पूरक पुस्तकों की सूची 45 दिन पूर्व जिला प्रशासन को अनुमोदन हेतु प्रस्तुत करनी होगी।
शिकायत प्रमाणित होने पर स्कूल पर वसूली गई राशि का 10 गुना दंड लगाया जाएगा।
इस बैठक में यह भी निर्देशित किया गया कि सी.बी.एस.ई. एफिलेशन बाई लॉ 2018 और छत्तीसगढ़ शासन अशासकीय विद्यालय फीस अधिनियम, 2020 का सख्ती से पालन किया जाएगा।
जिला प्रशासन ने इस कार्रवाई के माध्यम से निजी विद्यालयों में अनुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने का संदेश दिया है।









