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Bureau Report
प्रतापपुर। अंबिकापुर–बनारस मुख्य मार्ग पर स्थित भैंसामुंडा महानदी पुल की बदहाल स्थिति एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। लगातार
समाचार प्रकाशित होने और जन शिकायतों के बाद सूरजपुर कलेक्टर रैना जमील के निर्देश पर तीन-चार दिन पहले पुल की मरम्मत का कार्य शुरू कराया गया था। लेकिन स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार ने कलेक्टर के निर्देशों को गंभीरता से लेने के बजाय केवल खानापूर्ति करते हुए मरम्मत कार्य पूरा दिखा दिया।
समाचार प्रकाशित होने और जन शिकायतों के बाद सूरजपुर कलेक्टर रैना जमील के निर्देश पर तीन-चार दिन पहले पुल की मरम्मत का कार्य शुरू कराया गया था। लेकिन स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार ने कलेक्टर के निर्देशों को गंभीरता से लेने के बजाय केवल खानापूर्ति करते हुए मरम्मत कार्य पूरा दिखा दिया।ग्रामीणों के अनुसार पुल पर मौजूद दर्जनों गहरे और जानलेवा गड्ढों में से केवल कुछ गड्ढों में ही सामग्री डालकर औपचारिकता निभाई गई, जबकि अधिकांश गड्ढे आज भी जस के तस बने हुए हैं। लगातार बारिश के कारण इन गड्ढों में पानी भर गया है, जिससे वाहन चालकों को उनकी गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता और दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ गया है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि मरम्मत कार्य तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं कराया गया। प्रशिक्षित मिस्त्रियों के बजाय सामान्य मजदूरों से काम कराकर गुणवत्ता से समझौता किया गया, जिसका परिणाम यह है कि पुल की स्थिति में कोई खास सुधार दिखाई नहीं दे रहा है।

भैंसामुंडा महानदी पुल अंबिकापुर–बनारस मुख्य मार्ग का अत्यंत व्यस्त पुल है, जहां से प्रतिदिन हजारों दोपहिया, चारपहिया और भारी वाहन गुजरते हैं। ऐसे में पुल पर बने गहरे गड्ढे किसी भी समय बड़े सड़क हादसे का कारण बन सकते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते स्थायी एवं गुणवत्तापूर्ण मरम्मत नहीं कराई गई, तो किसी भी दिन बड़ी जनहानि हो सकती है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कलेक्टर के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद संबंधित ठेकेदार ने लापरवाही बरती और सरकारी आदेश की भी अनदेखी की। इसे लेकर क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त है। लोगों ने पूरे मामले की तकनीकी जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने तथा पुल की गुणवत्ता मानकों के अनुसार दोबारा मरम्मत कराने की मांग की है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही पुल की स्थायी मरम्मत नहीं कराई गई और जानलेवा गड्ढों को पूरी तरह नहीं भरा गया, तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। उनका कहना है कि प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय तत्काल प्रभावी कार्रवाई करे, ताकि आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।










