बलरामपुर / देश आजादी के उत्सव की तैयारी में है। गांव-गांव तिरंगा लहराने और स्वतंत्रता दिवस के जश्न की तैयारियों के बीच जिले के किसान भी बदलते भारत की नई तस्वीर से जुड़ रहे हैं। जहां पीडीएस दुकान पर राशन लेने पहुंचे किसानों को चावल के साथ एग्रीस्टैक पंजीयन की सुविधा भी मिल रही है।
एग्रीस्टैक पंजीयन किसानों के लिए महज एक डिजिटल प्रक्रिया नहीं, बल्कि खेती-किसानी से जुड़ी जरूरी सुविधाओं तक आसान पहुंच का माध्यम है। पंजीयन नहीं होने की स्थिति में धान खरीदी, खाद-बीज जैसी कृषि संबंधी सुविधाओं का लाभ लेने में कठिनाई हो सकती है। साथ ही डिजिटल क्रॉप सर्वे में किसानों और उनकी फसलों से संबंधित जानकारी दर्ज करने में भी यह महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगी।
मंगरहारा के किसान श्री भीन ने पीडीएस दुकान पर अपना एग्रीस्टैक पंजीयन कराया। उन्होंने कहा कि गांव में ही यह सुविधा मिलने से काफी सहूलियत हुई है। उन्होंने बताया, एग्रीस्टैक पंजीयन से धान बेचने, खाद-बीज लेने और फसल से जुड़ी डिजिटल जानकारी दर्ज कराने जैसी जरूरी प्रक्रियाओं में सुविधा मिलेगी।
उचित मूल्य दुकान पर राशन लेने पहुंचे किसानों को एग्रीस्टैक पंजीयन के महत्व की जानकारी दी गई। दुकान में ही
पंजीयन की सुविधा उपलब्ध होने से किसानों को इसके लिए अलग से कार्यालय जाने की आवश्यकता नहीं पड़ी। राशन लेने के साथ ही उनका जरूरी डिजिटल पंजीयन भी पूरा हुआ। नंदू कुशवाहा ने कहा कि एक ही जगह चावल भी मिल गया और एग्रीस्टैक का पंजीयन भी हो गया। इससे हमारा समय और मेहनत दोनों की बचत हुई है।
आजादी के उत्सव के बीच गांवों तक पहुंचती यह डिजिटल सुविधा विकास की उस तस्वीर को सामने रखती है, जहां तकनीक अब शहरों तक सीमित नहीं, बल्कि किसानों की पहुंच तक आ रही है। पीडीएस दुकान जैसे रोजमर्रा की जरूरत से जुड़े केंद्र अब किसानों को डिजिटल कृषि व्यवस्था से जोड़ने का माध्यम भी बन रहे हैं।
जहां तिरंगा, स्वतंत्रता, स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है, वहीं एग्रीस्टैक पंजीयन किसानों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में बढ़ता कदम है। गांव का किसान अब बदलती कृषि व्यवस्था के साथ कदम मिलाते हुए डिजिटल भारत की विकास यात्रा का सक्रिय हिस्सा बन रहा है।








