Written by
Bureau Report
बिश्रामपुर। राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-43 के किनारे बसे ग्राम पंचायत केशवनगर में नाली की अधूरी व्यवस्था ग्रामीणों के लिए गंभीर परेशानी बन
गई है। शहर की नाली जहां खत्म होती है, वहीं से ग्रामीणों की मुसीबत शुरू हो जाती है। छत्तीसगढ़ ढाबा से करीब 100 मीटर दूर रहने वाले प्रहलाद प्रजापति पिछले लगभग दो वर्षों से गंदे पानी की समस्या से जूझ रहे हैं।
गई है। शहर की नाली जहां खत्म होती है, वहीं से ग्रामीणों की मुसीबत शुरू हो जाती है। छत्तीसगढ़ ढाबा से करीब 100 मीटर दूर रहने वाले प्रहलाद प्रजापति पिछले लगभग दो वर्षों से गंदे पानी की समस्या से जूझ रहे हैं।प्रहलाद प्रजापति के मुताबिक बिश्रामपुर शहर की नाली का पानी छत्तीसगढ़ ढाबा के पास आकर जमा हो जाता है। इसके आगे निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण गंदा पानी बहकर उनकी निजी भूमि और मकान के आसपास जमा हो रहा है। लगातार जलभराव और नमी के चलते मकान की हालत जर्जर हो चुकी है। स्थिति यह है कि परिवार को अब मकान के अचानक क्षतिग्रस्त होने का डर सताने लगा है और प्रहलाद प्रजापति को मजबूरी में अपना घर छोड़कर दूसरी जगह रहने के लिए विवश होना पड़ रहा है।
नाली खत्म, शुरू हो जाती है ग्रामीणों की परेशानी
ग्रामीण का कहना है कि शहर की नाली का निर्माण छत्तीसगढ़ ढाबा तक किया गया है, लेकिन इसके आगे गंदे पानी की निकासी के लिए कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है। शहर से आने वाला नाली और गटर का पानी आसपास फैलने के बाद आखिर में उनकी निजी भूमि और मकान के आसपास जमा हो जाता है। पिछले करीब दो वर्षों से यह समस्या लगातार बनी हुई है।
बारिश के दिनों में स्थिति और गंभीर हो जाती है। बारिश का पानी और नालियों से आने वाला गंदा पानी मिलकर बड़े पैमाने पर जलभराव कर देता है। हालांकि बारिश खत्म होने के बाद भी पानी लंबे समय तक जमा रहता है। इससे क्षेत्र में दुर्गंध बनी रहती है और मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल बरसात की समस्या नहीं, बल्कि पूरे साल बनी रहने वाली परेशानी है।
गंदे पानी ने मकान की नींव को किया कमजोर

प्रहलाद प्रजापति का कहना है कि लगातार पानी जमा रहने का सीधा असर उनके मकान पर पड़ा है। पानी और नमी के कारण मकान की दीवारों सहित अन्य हिस्से प्रभावित हुए हैं और इसकी हालत जर्जर हो चुकी है। मकान के कमजोर होने से परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है जिससे घर में रहना जोखिम भरा महसूस हो रहा है।
सात-आठ घरों के लोग भी परेशान
समस्या सिर्फ प्रहलाद प्रजापति के परिवार तक सीमित नहीं है। आसपास के करीब सात-आठ घरों के लोग भी गंदे पानी, दुर्गंध और मच्छरों के प्रकोप से परेशान हैं। ग्रामीणों के मुताबिक नाली की उचित निकासी नहीं होने से पूरे क्षेत्र का वातावरण प्रभावित हो रहा है।
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि छत्तीसगढ़ ढाबा के पास जहां वर्तमान नाली समाप्त हो रही है, वहां से आगे तक व्यवस्थित नाली का निर्माण कराया जाए। साथ ही गंदे पानी की निकासी के लिए स्थायी व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में पानी निजी भूमि और घरों के आसपास जमा न हो और ग्रामीणों को इस समस्या से राहत मिल सके।










