कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य ग्राम एवं स्थानीय स्तर पर जैव विविधता के संरक्षण, संवर्धन एवं सतत उपयोग के साथ-साथ जैव संसाधनों से जुड़े स्थानीय समुदायों की भूमिका, अधिकारों एवं दायित्वों की व्यवहारिक और संस्थागत जानकारी प्रदान करना था।इस कार्यशाला में सरगुजा जिले की 07 जनपद पंचायतों के 65 ग्राम पंचायत सचिवों एवं जैव विविधता प्रबंधन समिति के सदस्यों ने सहभागिता की। कार्यशाला का शुभारंभ श्री अमिताभ बाजपेयी, सदस्य सचिव, छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड, श्री विपुल अग्रवाल, वनमंडलाधिकारी, सूरजपुर, श्री कुणाल मिश्रा, अनुविभागीय वन अधिकारी तथा श्री आर.के. खुंटे संयुक्त आयुक्त एवं प्राचार्य क्षेत्रीय पंचायत एवं ग्रामीण विकास प्रशिक्षण केन्द्र, सरगुजा, अंबिकापुर की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ।
जैव विविधता संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भूमिका पर जोर
प्रशिक्षण के दौरान विषय विशेषज्ञ डॉ. सुरजीत विक्रमन, एसोसिएट प्रोफेसर, NIRDPR, हैदराबाद, वैज्ञानिक डॉ. नीतू हरमुख, छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड, अरण्य भवन, रायपुर, विशेषज्ञ श्रीमती अनुभा उपाध्याय द्विवेदी, छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड, रायपुर तथा श्री राकेश साहू, राज्य सलाहकार, NIRDPR/SIRD छत्तीसगढ़ ने प्रतिभागियों को विभिन्न विषयों पर जानकारी एवं मार्गदर्शन दिया।
प्रशिक्षण में जैव विविधता शासन की अवधारणा और स्थानीय स्तर पर इसकी आवश्यकता, जैव विविधता संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भूमिका तथा जैव विविधता प्रबंधन समितियों के दायित्वों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों को जैव विविधता अधिनियम, 2002 तथा वर्ष 2023 में किए गए संशोधनों के प्रमुख प्रावधानों एवं स्थानीय स्तर पर उनके प्रभाव की जानकारी दी गई।
कार्यशाला में जैव विविधता प्रबंधन समिति (BMC), छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड (SBB) एवं राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) की संस्थागत संरचना, दायित्वों और स्थानीय शासन के साथ समन्वय की प्रक्रिया को समझाया गया। ग्राम पंचायत स्तर पर जैव विविधता के संरक्षण और प्रबंधन में विभिन्न संस्थाओं की भूमिका पर भी विस्तारपूर्वक चर्चा की गई।
जन जैव विविधता अभिलेख तैयार करने की दी गई जानकारी
प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण विषय जन जैव विविधता अभिलेख (People’s Biodiversity Register-PBR) रहा। प्रतिभागियों को PBR तैयार करने की प्रक्रिया,
स्थानीय जैव संसाधनों एवं पारंपरिक ज्ञान से संबंधित आवश्यक जानकारी के संकलन, उसके दस्तावेजीकरण तथा अभिलेख को व्यवस्थित एवं उपयोगी रूप में तैयार करने के व्यावहारिक चरणों की जानकारी दी गई।इसके साथ ही अभिगम एवं लाभ-साझेदारी (Access and Benefit Sharing-ABS) की अवधारणा पर भी विस्तार से चर्चा हुई। स्थानीय समुदायों के अधिकारों, जैव संसाधनों के उपयोग से जुड़ी प्रक्रियाओं तथा जैव विविधता शासन में समुदाय की भागीदारी और लाभ-साझेदारी के महत्व को उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया।
प्रशिक्षण में मानव कल्याण के लिए जैव विविधता संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग तथा स्थानीय स्तर पर जैव विविधता संरक्षण के लिए कार्ययोजना तैयार करने के संबंध में मार्गदर्शन दिया गया। स्थानीय जैव संसाधनों के संरक्षण के साथ उनके विवेकपूर्ण एवं सतत उपयोग के माध्यम से समुदायों के जीवन और आजीविका को बेहतर बनाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई।
वहीं, जैव विविधता प्रबंधन समितियों के कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (Standard Operating Procedure-SOP) की जानकारी दी गई, ताकि ग्राम एवं स्थानीय स्तर पर जैव विविधता संरक्षण से संबंधित गतिविधियों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप व्यवस्थित ढंग से संचालित किया जा सके।
कार्यशाला में विषय विशेषज्ञों द्वारा प्रस्तुतिकरण, प्रतिभागियों के साथ संवादात्मक चर्चा तथा व्यावहारिक जानकारी साझा की गई। प्रतिभागियों ने स्थानीय जैव विविधता के संरक्षण, पारंपरिक ज्ञान के दस्तावेजीकरण, जन जैव विविधता अभिलेख तैयार करने और जैव विविधता प्रबंधन समितियों की प्रभावी भूमिका से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।
कार्यशाला का मुख्य संदेश रहा कि स्थानीय स्तर पर जैव विविधता का प्रभावी संरक्षण तभी संभव है, जब स्थानीय समुदाय, ग्राम पंचायत, जैव विविधता प्रबंधन समिति और संबंधित विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें। इस दिशा में जैव विविधता प्रबंधन समितियों के सदस्यों एवं ग्राम पंचायत सचिवों की भूमिका महत्वपूर्ण है।










