सरगुजा ओलंपिक के समापन के बाद सीतापुर के 50 से अधिक खिलाड़ी गांधी स्टेडियम में फंसे रहे, विधायक को वीडियो कॉल कर बताई परेशानी, आधी रात को भोजन और बस की हुई व्यवस्था
अंबिकापुर।
ग्रामीण क्षेत्रों की खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और उन्हें बेहतर मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आयोजित सरगुजा ओलंपिक का समापन अव्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही के कारण सवालों के घेरे में आ गया है। जिला स्तरीय प्रतियोगिता समाप्त होने के बाद सीतापुर जनपद के 50 से अधिक खिलाड़ी बच्चे देर रात तक गांधी स्टेडियम में भूखे-प्यासे अपने घर जाने के लिए भटकते रहे। हैरानी की बात यह है कि बच्चों को सुरक्षित घर पहुंचाने की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों की थी, उन्हें बच्चों की सुध तक नहीं रही। आखिरकार बच्चों ने सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो को वीडियो कॉल कर अपनी परेशानी बताई, जिसके बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया।
जानकारी के अनुसार बुधवार को आयोजित जिला स्तरीय सरगुजा ओलंपिक का समापन शाम करीब छह बजे हुआ। प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए सीतापुर जनपद के 50 से अधिक बच्चे भी पहुंचे थे। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद सभी जनपद पंचायतों को अपने-अपने खिलाड़ियों को वापस घर पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके लिए प्रत्येक जनपद पंचायत को ब्लॉक स्तरीय प्रतियोगिता और चयनित खिलाड़ियों को जिला स्तर तक लाने-ले जाने के लिए तीन लाख रुपये का बजट भी आवंटित किया गया था। इसके बावजूद सीतापुर के बच्चों की वापसी की समुचित व्यवस्था नहीं की गई।
बच्चों ने दोपहर में भोजन किया था। प्रतियोगिता समाप्त होने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि बस आएगी और वे अपने घर लौट सकेंगे, लेकिन शाम से रात हो गई और बस का इंतजार खत्म नहीं हुआ। दूसरी ओर जिम्मेदार अधिकारी बच्चों की परेशानी से अनजान बने रहे। रात करीब 10:30 बजे गांधी स्टेडियम के आसपास से गुजर रहे कुछ स्थानीय लोगों की नजर जब वहां परेशान हालत में बैठे बच्चों पर पड़ी, तब मामले की जानकारी सामने आई।
विधायक की पहल पर जागा प्रशासन
परेशान बच्चों ने वीडियो कॉल के माध्यम से सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो से संपर्क कर अपनी आपबीती बताई। बच्चों ने बताया कि वे काफी देर से भूखे-प्यासे बैठे हैं और अब तक उन्हें घर पहुंचाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है। विधायक ने तत्काल जिला प्रशासन के अधिकारियों से संपर्क कर बच्चों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके बाद जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी रोमा श्रीवास्तव स्वयं मौके पर पहुंचीं। उनके साथ आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त ललित शुक्ला सहित खेल एवं युवा कल्याण विभाग तथा जनपद पंचायत के अधिकारी-कर्मचारी भी पहुंचे।
आधी रात को भोजन, फिर बस से घर रवाना
प्रशासनिक अधिकारियों ने सभी बच्चों को गांधी स्टेडियम से नवापारा स्थित आदिवासी विकास विभाग के छात्रावास पहुंचाया। वहां तत्काल भोजन तैयार करवाकर बच्चों को खाना खिलाया गया। भोजन और बस की व्यवस्था करते-करते रात के 12 बज गए। इसके बाद दो बसों के माध्यम से बच्चों को सीतापुर रवाना किया गया। अधिकारियों ने निर्देश दिया कि प्रत्येक बच्चे को उसके घर तक सुरक्षित पहुंचाया जाए। मध्यरात्रि के बाद बच्चे अपने-अपने घर पहुंच सके।
तीन लाख का बजट आखिर किस काम आया?
इस पूरे घटनाक्रम ने जनपद पंचायत सीतापुर और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब खिलाड़ियों के परिवहन और व्यवस्था के लिए प्रत्येक जनपद को तीन लाख रुपये का बजट दिया गया था, तो फिर बच्चों को घंटों तक भूखे-प्यासे क्यों इंतजार करना पड़ा? जिम्मेदार अधिकारियों ने कार्यक्रम समाप्त होने के बाद बच्चों की वापसी की निगरानी क्यों नहीं की? अब बस में तकनीकी खराबी आने की बात कही जा रही है, लेकिन यदि ऐसा था तो वैकल्पिक व्यवस्था समय रहते क्यों नहीं की गई? ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के नाम पर आयोजित इस आयोजन में बच्चों को हुई परेशानी ने व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है।










