बिना रसीद वसूले जा रहे 10 रुपए, सड़क पर सजी दुकानें; एंबुलेंस तक फंस रही ट्रैफिक में, नगर निगम की व्यवस्था पर उठे सवाल
अंबिकापुर। शहर का सबसे व्यस्त और संवेदनशील माना जाने वाला बिलासपुर चौक इन दिनों अव्यवस्था और लापरवाही का प्रतीक बनता जा रहा है। जिस
स्थान पर दिनभर भारी वाहनों, बसों, ट्रकों और चारपहिया वाहनों की लगातार आवाजाही रहती है, उसी सड़क किनारे नगर निगम की मौन सहमति से सब्जी बाजार सज रहा है। स्थिति यह है कि सड़क के दोनों ओर ठेले और सब्जी की दुकानें लगने से शाम होते-होते पूरा चौक जाम की चपेट में आ जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस व्यवस्था पर रोक नहीं लगी तो यहां कभी भी बड़ा सड़क हादसा हो सकता है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इस बाजार में बैठने वाले प्रत्येक सब्जी विक्रेता से प्रतिदिन 10 रुपए की वसूली की जाती है, लेकिन इसके बदले कोई रसीद नहीं दी जाती। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि यह राशि किसके निर्देश पर और किस मद में ली जा रही है। यदि नगर निगम अधिकृत रूप से शुल्क वसूल रहा है तो रसीद क्यों नहीं दी जा रही, और यदि अधिकृत नहीं है तो फिर यह वसूली कौन कर रहा है? इस पूरे मामले में पारदर्शिता का अभाव नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है।
बिलासपुर चौक शहर का प्रमुख यातायात केंद्र है। इस मार्ग से प्रतिदिन हजारों वाहन गुजरते हैं। ट्रक, बस, स्कूल वाहन, एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाओं के वाहन भी इसी रास्ते से होकर निकलते हैं। लेकिन सड़क के किनारे लगने वाले सब्जी बाजार के कारण सड़क की चौड़ाई आधी रह जाती है। ठेले सड़क तक फैल जाते हैं और खरीदारी करने वाले लोग भी सड़क पर ही खड़े होकर सब्जियां खरीदते हैं। इससे वाहनों के निकलने के लिए पर्याप्त जगह नहीं बचती और लंबा जाम लगना आम बात हो गई है।
सबसे चिंताजनक स्थिति शाम के समय देखने को मिलती है। कार्यालयों की छुट्टी और बाजार की भीड़ के दौरान बिलासपुर चौक पूरी तरह जाम में तब्दील हो
जाता है। कई बार एंबुलेंस तक इस जाम में फंस जाती हैं। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में होने वाली देरी किसी की जान पर भारी पड़ सकती है। मौके पर तैनात ट्रैफिक पुलिसकर्मी भी व्यवस्था संभालने में असहाय नजर आते हैं। सीमित संसाधनों और सड़क पर फैले अतिक्रमण के बीच उनका प्रयास भी नाकाफी साबित होता है।
स्थानीय व्यापारियों और राहगीरों का कहना है कि यह बाजार पूरी तरह जोखिम भरे स्थान पर संचालित हो रहा है। दिनभर तेज रफ्तार भारी वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं। सड़क से महज कुछ फीट की दूरी पर सब्जी खरीदते लोग, उनके साथ छोटे बच्चे और सड़क पर खड़े ठेले किसी भी समय बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। लोगों का कहना है कि यदि किसी वाहन का संतुलन बिगड़ जाए या ब्रेक फेल हो जाए तो बड़ी जनहानि से इनकार नहीं किया जा सकता।
हैरानी की बात यह है कि नगर निगम को इस पूरी स्थिति की जानकारी होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निगम प्रशासन ने इस अव्यवस्था पर आंखें मूंद रखी हैं। नियमित निरीक्षण और यातायात व्यवस्था सुधारने के दावे केवल कागजों तक सीमित दिखाई देते हैं। नागरिकों का कहना है कि नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों को इस समस्या का समाधान निकालने के बजाय इसकी अनदेखी करने की आदत पड़ गई है।
शहरवासियों का मानना है कि यदि सब्जी विक्रेताओं के लिए वैकल्पिक और सुरक्षित स्थान निर्धारित कर दिया जाए तो एक ओर उनकी आजीविका भी प्रभावित नहीं होगी और दूसरी ओर शहर के सबसे व्यस्त चौक पर लगने वाले जाम से भी राहत मिलेगी। नगर निगम का दायित्व है कि वह सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को प्राथमिकता देते हुए ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करे जिससे आम जनता को परेशानी का सामना न करना पड़े।
बिलासपुर चौक पर वर्तमान स्थिति केवल यातायात की समस्या नहीं, बल्कि जनसुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुकी है। यदि समय रहते नगर निगम, जिला प्रशासन और यातायात पुलिस ने संयुक्त रूप से प्रभावी कार्रवाई नहीं की तो किसी बड़े हादसे के बाद जवाबदेही तय करना मुश्किल होगा। शहरवासी अब यह सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर नगर निगम किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार क्यों कर रहा है? क्या किसी की जान जाने के बाद ही प्रशासन की नींद खुलेगी?










