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Bureau Report
छात्राओं के शौचालय में पानी नहीं, खुले में जाने की मजबूरी; पेयजल संकट से भी जूझ रहा स्कूल
बिश्रामपुर। जिले के शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल कंदरई में शिक्षा व्यवस्था से अधिक स्कूल भवनों की बदहाली चिंता का विषय बन गई है। करीब 750 छात्र-छात्राएं ऐसे परिसर में पढ़ाई करने को मजबूर हैं, जहां एक भवन पूरी तरह जर्जर होकर गिरने की स्थिति में पहुंच चुका है, जबकि वर्तमान में संचालित भवन भी सीपेज की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। लंबे समय से शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार विभागों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने से विद्यार्थियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।स्कूल परिसर में तीन अलग-अलग वर्षों में भवनों का निर्माण कराया गया। वर्ष 2000 में बना भवन आज भी अपेक्षाकृत सुरक्षित है, जबकि 2007 में पीडब्ल्यूडी द्वारा निर्मित भवन पूरी तरह जर्जर होकर खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है। वहीं 2014 में बने भवन में अधिकांश कक्षाएं संचालित हो रही हैं, लेकिन लगभग हर कमरे में सीपेज की समस्या बनी हुई है।
2007 का भवन बना जानलेवा खतरा
वर्ष 2007 में निर्मित भवन की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि उसमें प्रवेश करना भी जोखिम भरा माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार इस भवन में लगभग दस वर्ष तक ही पढ़ाई संचालित हो सकी, जिसके बाद लगातार इसकी स्थिति
बिगड़ती गई।
बिगड़ती गई।भवन के कई हिस्से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं और इसे तकनीकी रूप से डिस्मेंटल किए जाने की आवश्यकता बताई जा रही है। इसके बावजूद यह भवन आज भी स्कूल परिसर में खड़ा है। चिंताजनक बात यह है कि भवन के बरामदे में छात्र अपनी साइकिलें खड़ी करते हैं तथा एक कमरे में स्कूल का सामान भी रखा गया है। ऐसे में किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है।
वर्तमान में जिन कमरों में पढ़ाई हो रही है, वे भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। वर्ष 2014 में बने भवन में लगभग प्रत्येक कक्षा में सीपेज की समस्या बनी हुई है। बारिश के मौसम में दीवारों और छत से पानी रिसने के कारण विद्यार्थियों और शिक्षकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। मरम्मत के सहारे पढ़ाई तो जारी है, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं हो पाया है।
26 साल पुराना भवन मजबूत,बाद के बने पूरी तरह जर्जर
स्कूल की स्थिति सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है। वर्ष 2000 में बना भवन आज भी उपयोग योग्य है, जबकि उसके बाद बने दोनों भवनों की हालत खराब हो चुकी है। विशेष रूप से 2007 में बना भवन कुछ वर्षों में ही जर्जर हो जाना निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं
स्कूल भवन की बदहाल स्थिति को लेकर 8 अक्टूबर 2025 को कलेक्टर, एसडीएम, जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ), विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) सहित संबंधित अधिकारियों को लिखित शिकायत भेजी गई थी। शिकायत में जर्जर भवन को हटाने और विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई थी, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है। वर्तमान में लगातार हो रही बारिश के कारण खतरा और बढ़ गया है।
शौचालय में पानी नहीं, छात्राओं को बाहर जाने की मजबूरी
स्कूल में दो दो शौचालय होने के बावजूद उनमें पानी की व्यवस्था नहीं है। पानी के अभाव, गंदगी और बदबू के कारण छात्र-छात्राएं लंबे समय से शौचालय का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। सबसे अधिक परेशानी छात्राओं को उठानी पड़ रही है, जिन्हें शौच के लिए विद्यालय परिसर से दूर खेतों की ओर जाना पड़ता है। पीरियड के दौरान बच्चियां स्कूल से अनुपस्थित होने के लिए मजबूर हैं।यह स्थिति उनकी सुरक्षा और गरिमा, दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।वही विद्यालय में पेयजल व्यवस्था भी बदतर है।शुद्ध पेयजल के आभाव में बच्चे पास के घरों बाजार तक कभी भी भटकते देखे जा सकते हैं।









