बिश्रामपुर। क्षेत्र की उन महिलाओं और छात्राओं के लिए राहत भरी खबर है, जिनकी पढ़ाई किसी कारणवश बीच में ही छूट गई थी। अब उन्हें दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से सरगुजा ज्ञानोदय एसोसिएशन ने एक प्रेरणादायी पहल शुरू की है। संस्था के संचालक विजयराज अग्रवाल ने बताया कि ड्रॉपआउट महिलाओं एवं छात्राओं को उच्च शिक्षा और कंप्यूटर आधारित प्रोफेशनल कोर्स पूरी तरह निःशुल्क कराए जाएंगे। उन्होंने बताया कि जयनगर पुलिस थाना के सामने स्थित वीकेएम परिसर में महिलाओं को बिना किसी ट्यूशन फीस के कॉलेज डिग्री और व्यावसायिक डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिया जाएगा, ताकि वे शिक्षा प्राप्त कर रोजगार के बेहतर अवसर हासिल कर सकें और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें।संस्था द्वारा बीए, बीकॉम, डीसीए, बीसीए तथा पीजीडीसीए जैसे पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इन कोर्सों के लिए चयनित महिलाओं से किसी भी प्रकार की ट्यूशन फीस नहीं ली जाएगी। संस्था का मानना है कि आर्थिक कारणों से शिक्षा से दूर हुई महिलाओं को यदि दोबारा अवसर मिले तो वे अपने परिवार और समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। महिलाओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए संस्था विशेष समय पर कक्षाओं के संचालन पर भी विचार कर रही है, ताकि गृहिणियां और नौकरीपेशा महिलाएं भी बिना किसी परेशानी के अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें। इससे बड़ी संख्या में महिलाएं शिक्षा के साथ अपने घरेलू और व्यावसायिक दायित्वों का भी संतुलन बना सकेंगी।विजयराज अग्रवाल ने बताया कि संस्था केवल शिक्षा तक ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कोर्स पूरा करने के बाद महिलाओं को कंप्यूटर ऑपरेटर, अकाउंटेंट सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्लेसमेंट दिलाने में भी सहयोग किया जाएगा। उन्होंने बताया कि बीए, बीकॉम, डीसीए. और बीसीए में प्रवेश के लिए न्यूनतम योग्यता 12वीं उत्तीर्ण, जबकि पीजीडीसीए के लिए स्नातक होना अनिवार्य है। इच्छुक महिलाओं की सहायता के लिए हेल्प डेस्क भी स्थापित किया गया है। प्रवेश प्रक्रिया 15 अगस्त तक चलेगी। विजयराज अग्रवाल ने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य केवल महिलाओं को शिक्षित करना ही नहीं, बल्कि बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति पर रोक लगाना भी है। उनका कहना है कि कई बार पढ़ाई छूट जाने के बाद अभिभावक कम उम्र में ही बेटियों का विवाह कर देते हैं। यदि बेटियां दोबारा शिक्षा से जुड़ेंगी, तो वे उच्च शिक्षा प्राप्त कर अपने भविष्य का बेहतर निर्माण कर सकेंगी और समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बनेंगी।