सीतापुर। नगर पंचायत सीतापुर में मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) ओमप्रकाश तिवारी की कार्यशैली को लेकर नगर पंचायत परिषद और सीएमओ के बीच विवाद गहराता नजर आ रहा है। सीएमओ की कथित सुस्त एवं उदासीन कार्यप्रणाली और परिषद के नियमों व अधिकारों की अनदेखी के आरोप लगाते हुए नगर पंचायत परिषद ने उनके विरुद्ध निंदा प्रस्ताव पारित किया है। इसके बाद नगर पंचायत अध्यक्ष सहित पार्षदों ने सरगुजा कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मामले में हस्तक्षेप करते हुए सीएमओ के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
बैठक नहीं होने से विकास कार्य प्रभावित होने का आरोप-
परिषद अध्यक्ष एवं पार्षदों का आरोप है कि करीब 09 माह तक नगर पंचायत परिषद की बैठक आयोजित नहीं की गई। इसके चलते नगर के विकास एवं जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा और निर्णय नहीं हो सके। परिषद सदस्यों का कहना है कि बैठक नहीं होने के कारण कई आवश्यक प्रस्ताव और विकास कार्य लंबित रहे, जिसका सीधा असर नगर के विकास पर पड़ा।
परिषद के अधिकारों की अनदेखी का भी आरोप-
ज्ञापन में परिषद सदस्यों ने आरोप लगाया है कि नगर पंचायत अधिनियम एवं परिषद के अधिकारों की कथित तौर पर अनदेखी करते हुए कार्य किया जा रहा है। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि नगर पंचायत की प्रशासनिक व्यवस्था में निर्वाचित परिषद की भूमिका और अधिकारों का सम्मान होना जरूरी है। मौजूदा परिस्थितियों को लेकर पार्षदों एवं आम नागरिकों में असंतोष की स्थिति निर्मित होने की बात भी कही गई है।
कलेक्टर से सीएमओ को हटाने की मांग-
नगर पंचायत अध्यक्ष एवं पार्षदों ने कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा सीएमओ ओमप्रकाश तिवारी के विरुद्ध आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की है। साथ ही वर्तमान सीएमओ को तत्काल प्रभाव से पद से हटाकर नगर पंचायत सीतापुर के प्रशासनिक एवं विकास कार्यों के सुचारु संचालन के लिए किसी सक्षम अधिकारी को प्रभार सौंपने की मांग की गई है।
परिषद सदस्यों का कहना है कि नगर पंचायत प्रशासन की कार्यप्रणाली प्रभावित होने से विकास कार्यों की गति धीमी हुई है और जनहित से जुड़े कार्य भी बाधित हो रहे हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से मामले में शीघ्र हस्तक्षेप कर उचित निर्णय लेने की मांग की है।
अब निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। परिषद सदस्यों ने उम्मीद जताई है कि जनहित एवं नगर के विकास को ध्यान में रखते हुए प्रशासन मामले की निष्पक्ष जांच कर जवाबदेही तय करेगा और नगर पंचायत में बनी स्थिति का जल्द समाधान निकाला जाएगा।









