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Bureau Report
भाटापारा:- आदर्श रामलीला नाटक मंडली के 107वें वर्ष के चौथे दिन के मंचन में परशुराम-लक्ष्मण संवाद, केवट संवाद, सूर्पनखा,
खरदूषण, रावण संवाद, सीताहरण, जटायू मरण की भव्य लीलाओ की प्रस्तुति मंचन हुआ। परशुराम की भूमिका में कोमल शर्मा, केवट की भूमिका में जगदीश वैष्णव, राम कृपांश, लक्ष्मण वाशु, सीता रोशन, रावण मनोवेन्द्र, साधु रावण आदित्य, खरदूषण आदित्य और लक्की, जटायु की भूमिका में शुभ केशरवानी नजर आए । चौथे दिन रामलीला देखने भीड़ उमड़ी।
खरदूषण, रावण संवाद, सीताहरण, जटायू मरण की भव्य लीलाओ की प्रस्तुति मंचन हुआ। परशुराम की भूमिका में कोमल शर्मा, केवट की भूमिका में जगदीश वैष्णव, राम कृपांश, लक्ष्मण वाशु, सीता रोशन, रावण मनोवेन्द्र, साधु रावण आदित्य, खरदूषण आदित्य और लक्की, जटायु की भूमिका में शुभ केशरवानी नजर आए । चौथे दिन रामलीला देखने भीड़ उमड़ी।*चतुर्थ दिवस भगवान की आरती में विभिन्न वर्ग शामिल हुए*
भगवान श्रीराम की आरती में विभिन्न स्कूलों के प्राचार्य एवं डायरेक्टर उपस्थित हुए। आरती में माहेश्वरी समाज व अग्रवाल समाज के पदाधिकारी मौजूद रहे। उद्बोधन में आदित्य बिड़ला माहेश्वरी समाज फाउंडेशन के डायरेक्टर रामरतन मुंधड़ा, अग्रवाल समाज अध्यक्ष मदन अग्रवाल, गुरुकुल स्कूल के डायरेक्टर रौनक मुंधड़ा एवं नरेश अग्रवाल ने रामलीला कलाकारों
एवं आयोजन समिति की मेहनत को सराहते हुए संस्था के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। अंबुजा विद्यापीठ के प्राचार्य डॉ. एस. के. पाण्डे ने कहा कि किसी भी संस्था को 107 वर्षों तक चलाना अपने आप में बहुत कठिन और परिश्रम की बात है। इतने लंबे समय में कितनी ही सभ्यताएं और परंपराएं नष्ट हो जाती हैं, लेकिन यह रामलीला की खासियत है कि वह आज भी मजबूती से चल रही है और आज की युवा पीढ़ी को प्रेरित करने का कार्य कर रही है। मॉडल स्कूल की वाइस प्रिंसिपल श्रीमती नीलम तिवारी ने अपने उद्बोधन में कहा कि इन बच्चों को लंबे-लंबे संवाद मंच पर अभिनीत करते हुए देखना बहुत सुखद प्रतीत होता है और हमेशा ही श्रव्य से बेहतर दृश्य काव्य होता है जो इस मंच से जाहिर होता है। श्रीमती डॉ. पूजा समीर भृगु ने अपने उद्बोधन में कहा कि वह लगातार इस रामलीला को लंबे समय से बारीकी से देख रही हैं, उसके बाद भी इसमें उनको नयापन ही लगता है और वह कलाकारों के अभिभावकों को बहुत आदर देते हुए बोलीं कि और भी लोग ऐसी संस्था से जुड़ें।
एवं आयोजन समिति की मेहनत को सराहते हुए संस्था के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। अंबुजा विद्यापीठ के प्राचार्य डॉ. एस. के. पाण्डे ने कहा कि किसी भी संस्था को 107 वर्षों तक चलाना अपने आप में बहुत कठिन और परिश्रम की बात है। इतने लंबे समय में कितनी ही सभ्यताएं और परंपराएं नष्ट हो जाती हैं, लेकिन यह रामलीला की खासियत है कि वह आज भी मजबूती से चल रही है और आज की युवा पीढ़ी को प्रेरित करने का कार्य कर रही है। मॉडल स्कूल की वाइस प्रिंसिपल श्रीमती नीलम तिवारी ने अपने उद्बोधन में कहा कि इन बच्चों को लंबे-लंबे संवाद मंच पर अभिनीत करते हुए देखना बहुत सुखद प्रतीत होता है और हमेशा ही श्रव्य से बेहतर दृश्य काव्य होता है जो इस मंच से जाहिर होता है। श्रीमती डॉ. पूजा समीर भृगु ने अपने उद्बोधन में कहा कि वह लगातार इस रामलीला को लंबे समय से बारीकी से देख रही हैं, उसके बाद भी इसमें उनको नयापन ही लगता है और वह कलाकारों के अभिभावकों को बहुत आदर देते हुए बोलीं कि और भी लोग ऐसी संस्था से जुड़ें।









