मांड नदी में अवैध रेत कारोबार जारी, पांच ट्रैक्टर जब्त; बड़े कारोबारियों पर कार्रवाई कब?
छोटे वाहनों पर कार्रवाई से उठे सवाल, रेत के बड़े भंडार और अंतरराज्यीय परिवहन के कथित नेटवर्क की जांच की मांग
मो. हदीस
सीतापुर। मांड नदी में कथित अवैध रेत उत्खनन, परिवहन और भंडारण का मामला लगातार चर्चा में है। केशला, प्रतापगढ़ और भिठुवा सहित नदी के विभिन्न तटों से रेत के अवैध उत्खनन और भंडारण की शिकायतों के बीच खनिज विभाग ने रेत का परिवहन कर रहे पांच ट्रैक्टरों को जब्त कर थाने के सुपुर्द किया है। विभाग की इस कार्रवाई से रेत कारोबारियों में हलचल जरूर मची है, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कार्रवाई केवल छोटे वाहनों तक सीमित रहेगी या अवैध कारोबार में शामिल बड़े लोगों तक भी पहुंचेगी?
स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि मांड नदी के तटों से बड़े पैमाने पर रेत निकालकर विभिन्न स्थानों पर भंडारण किया जा रहा है। यह भी आरोप हैं कि यहां से रेत ट्रकों के माध्यम से दूसरे राज्यों तक भेजी जाती है। यदि इन शिकायतों में सच्चाई है, तो यह जांच का विषय है कि रेत कहां से निकाली जा रही है, उसका भंडारण किसकी अनुमति से हो रहा है और इस पूरे कारोबार के पीछे कौन लोग शामिल हैं।
पांच ट्रैक्टर जब्त, बड़े कारोबारियों पर कार्रवाई का इंतजार
खनिज विभाग की कार्रवाई के बाद क्षेत्र में अवैध रेत कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने को लेकर सवाल उठने लगे हैं। पांच ट्रैक्टरों को जब्त करना विभाग की कार्रवाई का हिस्सा है, लेकिन क्या इससे नदी से बड़े पैमाने पर रेत निकालने और उसका भंडारण करने की गतिविधियों पर रोक लग पाएगी?
सीतापुर, प्रतापगढ़, राधपुर और सोनतराई क्षेत्र में रेत के बड़े-बड़े भंडार होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में इन भंडारों की जांच करना और यह पता लगाना जरूरी है कि रेत वैध स्रोतों से लाई गई है या उसका उत्खनन नियमों के विरुद्ध किया गया है।
सवाल यह भी है कि यदि रेत का परिवहन दूसरे राज्यों तक किया जा रहा है, तो इस कारोबार से जुड़े बड़े वाहन मालिकों, भंडारणकर्ताओं और अन्य संबंधित लोगों की पहचान के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं? क्षेत्रवासियों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि विभाग इन शिकायतों की व्यापक जांच करता है या कार्रवाई कुछ वाहनों तक ही सीमित रह जाती है।
रेत के भंडारों की जांच होगी या छोटे वाहनों तक सीमित रहेगी कार्रवाई?
रेत के अवैध कारोबार को रोकने के लिए केवल परिवहन के दौरान वाहनों को पकड़ना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। इसके लिए उत्खनन स्थलों, रेत के भंडारण केंद्रों, परिवहन मार्गों और कारोबार से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच आवश्यक है।
यदि किसी स्थान पर बिना वैध अनुमति के रेत का भंडारण किया जा रहा है, तो उसके स्रोत और संबंधित दस्तावेजों की जांच होनी चाहिए। इसी तरह, बड़े पैमाने पर रेत के परिवहन की शिकायतों की पुष्टि होने पर संबंधित वाहनों और कारोबारियों की भूमिका की पड़ताल भी जरूरी है।
अब सवाल यह है कि खनिज विभाग इन शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या रेत के बड़े भंडारों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाता है। प्रभावी कार्रवाई के लिए पूरे नेटवर्क की जांच जरूरी है, ताकि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कदम उठाए जा सकें।
मांड नदी के अस्तित्व पर खतरा, राजस्व के नुकसान की भी आशंका
मांड नदी क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण प्राकृतिक जलस्रोत है। नदी के तटों से अनियंत्रित रेत उत्खनन होने पर उसके प्राकृतिक स्वरूप, तटीय संरचना और पर्यावरणीय संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। वहीं, यदि उत्खनन, परिवहन या भंडारण नियमों के विरुद्ध किया जा रहा है, तो शासन को मिलने वाले राजस्व के नुकसान की आशंका भी रहती है।
ऐसे में नदी को बचाने और खनिज नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए शिकायतों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। नदी के तटों पर कथित अवैध उत्खनन से लेकर रेत के भंडारण और बड़े वाहनों से परिवहन तक की गतिविधियों की पड़ताल होने पर ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
अब खनिज विभाग की अगली कार्रवाई पर नजर
पांच ट्रैक्टरों की जब्ती के बाद अब सबसे अहम सवाल यही है कि क्या खनिज विभाग रेत के बड़े भंडारों और कथित अवैध कारोबार के अन्य हिस्सों की भी जांच करेगा? क्या नदी के तटों पर उत्खनन की स्थिति का आकलन कर जिम्मेदार लोगों की पहचान की जाएगी?
मांड नदी को कथित अवैध रेत कारोबार से बचाने के लिए केवल वाहनों की जब्ती नहीं, बल्कि शिकायतों की निष्पक्ष जांच और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई जरूरी है। अब देखना होगा कि विभाग की कार्रवाई पांच ट्रैक्टरों तक सीमित रहती है या मामले की व्यापक जांच कर बड़े कारोबारियों की भूमिका भी सामने लाई जाती है।









