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Bureau Report
हर माह डेढ़ करोड़ से अधिक खर्च, फिर भी खदानों में चोरी पर अंकुश नहीं
बिश्रामपुर । एसईसीएल बिश्रामपुर क्षेत्र की एक्वेशन वर्कशॉप और बलरामपुर खदान में रविवार रात चोरी की वारदातों के दौरान चोरों द्वारा जमकर उत्पात मचाया गया। आरोप है कि केबल चोरी और यूकेलिप्टस के पेड़ों की अवैध कटाई का विरोध करने पर बदमाशों ने सुरक्षा कर्मियों के साथ मारपीट की और उनकी बाइक को आग के हवाले कर दिया। मामले में बिश्रामपुर पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज कर संदिग्धों की धरपकड़ तेज कर दी है। पुलिस आज दूसरे दिन भी चोरों के संभावित ठिकानों पर छापेमारी करती रही और कबाड़ का कारोबार करने वाले पुराने रिकॉर्ड वाले लोगों से भी पूछताछ की गई।बताया जा रहा है कि क्षेत्र में सक्रिय बदमाश अब कोयला, कबाड़ और केबल चोरी के साथ खदान क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण के लिए लगाए गए यूकेलिप्टस के पेड़ों को भी निशाना बना रहे हैं। पेड़ों की कटाई कर लकड़ियों की तस्करी किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। आरोप है कि इस अवैध गतिविधि में जयनगर, केनापारा और सिलफिली क्षेत्र
के कुछ युवकों का गिरोह सक्रिय है।
के कुछ युवकों का गिरोह सक्रिय है।50 मीटर से अधिक केबल चोरी
रविवार रात चोरों ने बंद पड़ी बलरामपुर खदान में प्रवेश कर 50 मीटर से अधिक आर्मर्ड केबल चोरी कर ली। इससे पहले करीब पखवाड़ेभर पूर्व भी चोरों ने सात-आठ खदानों से केबल चोरी की वारदातों को अंजाम दिया था। लगातार हो रही घटनाओं के बावजूद चोरी पर प्रभावी अंकुश नहीं लगने से एसईसीएल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
खदानों की सुरक्षा के लिए प्रबंधन त्रिपुरा स्टेट राइफल्स के जवानों के अलावा मैगजीन की सुरक्षा में सीआईएसएफ सहित क्षेत्र की सुरक्षा में विभागीय सुरक्षा कर्मियों की सेवाएं ले रहा है। इनकी तैनाती, वेतन और अन्य सुविधाओं पर
प्रबंधन प्रतिमाह डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर रहा है। इसके बावजूद खदान क्षेत्रों में चोरी की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
प्रबंधन प्रतिमाह डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर रहा है। इसके बावजूद खदान क्षेत्रों में चोरी की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।दो साल से तैनात हथियारबंद जवान, फिर भी चोरी जारी
खदानों की सुरक्षा में तैनात हथियारबंद जवान भी चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने में नाकाम साबित हो रहे हैं। बताया जाता है कि कोयला, कबाड़ और केबल चोरी रोकने के उद्देश्य से प्रबंधन ने त्रिपुरा स्टेट राइफल्स के जवानों के साथ अनुबंध किया था। दो साल से अधिक समय से जवान क्षेत्र में तैनात हैं, लेकिन चोरी की घटनाओं में अपेक्षित कमी नहीं आई है।
लगातार हो रही चोरी के बीच सुरक्षा कर्मियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। क्षेत्र में सुरक्षा कर्मियों और चोरों के बीच मिलीभगत की चर्चाएं भी हैं, हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। रविवार रात सुरक्षा कर्मियों के साथ मारपीट और बाइक जलाने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की चुनौतियों को और गंभीर कर दिया है।
वही एसईसीएल प्रबंधन द्वारा खदानों की सुरक्षा व्यवस्था की समय समय पर समीक्षा नहीं करने के आरोप लग रहे हैं ।








