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Bureau Report
बैकुंठपुर/ कोरिया जिले से जुड़े एक अत्यंत गंभीर और चर्चित मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने दैनिक समाचार पत्र में 10 जुलाई 2026 को प्रकाशित समाचार के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए छत्तीसगढ़ शासन एवं जिला प्रशासन के चार वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। आयोग ने मामले में तीन दिनों के भीतर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
जारी नोटिस के अनुसार आयोग ने प्रमुख सचिव, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग, छत्तीसगढ़ शासन, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) छत्तीसगढ़, कलेक्टर कोरिया तथा पुलिस अधीक्षक कोरिया को नोटिस भेजा है। यह नोटिस 10 जुलाई 2026 को जारी किया गया है।
नोटिस में उल्लेख किया गया है कि आयोग को दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर एवं डॉ. नंदकुमार साय द्वारा भेजी गई शिकायत/सूचना प्राप्त हुई है। शिकायत में प्रकाशित समाचार “चोरी का आरोप लगा मार्ट संचालक ने स्कूटी जब्त कर मांगे 50 हजार रुपये, किशोरी ने लगा ली फांसी” का उल्लेख करते हुए मामले की गंभीरता पर चिंता व्यक्त की गई है।
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338ए के तहत प्राप्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए इस प्रकरण की जांच प्रारंभ कर दी है। आयोग ने संबंधित अधिकारियों से निर्देशित किया है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों, अब तक की गई कार्रवाई तथा उपलब्ध तथ्यों से संबंधित संपूर्ण जानकारी तीन दिनों के भीतर आयोग को उपलब्ध कराई जाए। आयोग ने स्पष्ट किया है कि जानकारी डाक, व्यक्तिगत रूप से अथवा किसी अन्य स्वीकृत माध्यम से प्रस्तुत की जा सकती है।
आयोग ने अपने नोटिस में यह भी चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित अवधि के भीतर जवाब प्राप्त नहीं होता है तो वह संविधान के अनुच्छेद 338ए के अंतर्गत प्राप्त दीवानी न्यायालय जैसी शक्तियों का उपयोग करते हुए संबंधित अधिकारियों को समन जारी कर व्यक्तिगत अथवा प्रतिनिधि के माध्यम से उपस्थित होने के निर्देश दे सकता है।
कोरिया जिले के इस संवेदनशील मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सीधी दखल से प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिला प्रशासन और पुलिस आयोग के समक्ष क्या जवाब प्रस्तुत करते हैं तथा मामले की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है। यह कार्रवाई जिले में आदिवासी समाज से जुड़े मामलों में जवाबदेही और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।










