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Bureau Report
बिश्रामपुर। भटगांव तहसील क्षेत्र में वर्ष 2025 में आई भारी बारिश और आंधी-तूफान से क्षतिग्रस्त हुए मकानों के प्रभावित परिवार आज भी
सरकारी राहत का इंतजार कर रहे हैं। घटना को लगभग एक वर्ष बीतने के बावजूद ग्राम पंचायत राई के 11 प्रभावित परिवारों को अब तक मुआवजा राशि नहीं मिल सकी है। इससे पीड़ित परिवारों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।
सरकारी राहत का इंतजार कर रहे हैं। घटना को लगभग एक वर्ष बीतने के बावजूद ग्राम पंचायत राई के 11 प्रभावित परिवारों को अब तक मुआवजा राशि नहीं मिल सकी है। इससे पीड़ित परिवारों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।जानकारी के अनुसार, जुलाई 2025 में तेज बारिश और आंधी के कारण कई मकानों के खपरैल, सीमेंट शीट और टीन शेड उड़ गए थे, जबकि कई कच्चे मकान पूरी तरह या आंशिक रूप से ढह गए थे। प्रभावित परिवारों ने नियमानुसार पटवारी के माध्यम से सभी आवश्यक दस्तावेज जमा किए थे। स्थानीय स्तर पर सर्वे कर नुकसान का आकलन भी किया गया और प्रतिवेदन भटगांव तहसील के माध्यम से अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) भैयाथान कार्यालय भेजा गया। इसके बावजूद अब तक राहत राशि स्वीकृत नहीं हो सकी है।
इन परिवारों ने की मुआवजे की मांग
ग्राम राई के संजय जायसवाल, रामानंद पैकरा, सहाल पैकरा, रिझवार, जागीर साय, छब्बीस कुमार, पटवारी
यादव, बुधराम पैकरा, पारस देवांगन, अतवारू पैकरा तथा श्यामबाई ने बारिश और आंधी-तूफान से हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति राशि दिलाने की मांग की है। उनका कहना है कि सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद उन्हें अब तक कोई आर्थिक सहायता नहीं मिली।
यादव, बुधराम पैकरा, पारस देवांगन, अतवारू पैकरा तथा श्यामबाई ने बारिश और आंधी-तूफान से हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति राशि दिलाने की मांग की है। उनका कहना है कि सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद उन्हें अब तक कोई आर्थिक सहायता नहीं मिली।वहीं गांव के कोटवार उत्तम पाल देवांगन और रामकरण यादव का आरोप है कि उन्होंने भी पटवारी के माध्यम से आवश्यक दस्तावेज जमा किए थे, लेकिन उनका प्रकरण तहसील में जमा नहीं होने के कारण सूची में नाम शामिल नहीं हो सका। इसके चलते वे भी मुआवजे से वंचित हैं।
जनपद सदस्य ने जांच और कार्रवाई की उठाई मांग
क्षेत्र की जनपद सदस्य फुलकेली मरकाम ने मामले की निष्पक्ष जांच कर लापरवाह अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि सभी पात्र प्रभावित परिवारों को शीघ्र राहत राशि उपलब्ध कराई जानी चाहिए। यदि जल्द ही लंबित प्रकरणों का निराकरण नहीं किया गया तो वे पीड़ित परिवारों के साथ जिला मुख्यालय पहुंचकर आंदोलन करेंगी।
पीड़ित परिवारों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा के बाद राहत राशि समय पर मिलनी चाहिए थी, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के कारण उन्हें एक वर्ष बाद भी सहायता के लिए भटकना पड़ रहा है।










