बीमारों को खटिया पर ले जाना पड़ रहा
बिहारपुर। बारिश आते ही दूरस्थ गांवों की हकीकत फिर सामने आ गई है। चांदनी-बिहारपुर के ग्राम पंचायत बिहारपुर के चौकापारा में 300 परिवारों के लिए स्कूल, अस्पताल और बाजार जाने का सिर्फ एक ही रास्ता है, और वो रास्ता आज पूरी तरह दलदल बन चुका है। ग्राम पंचायत बिहारपुर के आश्रित ग्राम चौकापारा में लगभग 100 पंडो जनजाति के परिवार और अन्य जातियों के मिलाकर कुल करीब 300 घर हैं। इस 300 घरों की आबादी का स्कूल, अस्पताल और मुख्य सड़क से जुड़ने का एकमात्र साधन यही कच्चा रास्ता है।लेकिन बरसात में ये रास्ता इतना खराब हो जाता है कि पैदल चलना भी मुश्किल है। जगह-जगह गहरे गड्ढे और कीचड़ भरा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि स्कूली बच्चे इसी कीचड़ में नंगे पैर फिसलते हुए स्कूल जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात में यहां से गाड़ियों का आना-जाना पूरी तरह बंद हो जाता है। अगर कोई बीमार हो जाए तो उसे अस्पताल ले जाने के लिए खटिया का सहारा लेना पड़ता
है। बच्चों की पढ़ाई सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही है क्योंकि वो रोज इसी रास्ते से स्कूल जाते हैं।ग्रामीणों ने बताया कि इस रोड के मुरमीकरण की शिकायत वे पिछले 1 साल से मुखिया, सरपंच और सचिव से कर रहे हैं। जब हमारी टीम ने सरपंच-सचिव से बात की तो उन्होंने कहा कि “रोड का एस्टीमेट तैयार कर लिया गया है। मौसम साफ होते ही मुरमीकरण का काम शुरू कर दिया जाएगा।”लेकिन गांव वालों का आरोप है कि सरपंच-सचिव सिर्फ गुमराह कर रहे हैं। पिछले साल भी यही कहा गया था लेकिन आज तक एक ट्रॉली मुरम भी नहीं डाली गई। इसी लापरवाही का खामियाजा पूरे गांव को भुगतना पड़ रहा है।चौकापारा के ग्रामीणों ने कलेक्टर सूरजपुर और जिला पंचायत सीइओ से मांग की है कि इस रास्ते का तत्काल मुरमीकरण कराया जाए, ताकि बरसात में बच्चों की पढ़ाई और मरीजों की जान से खिलवाड़ न हो।










