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Bureau Report
कभी अखिल भारतीय गोल्ड कप जैसे बड़े आयोजनों का गवाह रहा मैदान, अब जर्जर गैलरी और उखड़े शेड ने बढ़ाई चिंता
बिश्रामपुर। कभी फुटबॉल की सीटी बजते ही जहां पूरा कोयलांचल रोमांच से भर उठता था, जहां देश के अलग-अलग राज्यों से नामचीन खिलाड़ी अपने खेल कौशल का प्रदर्शन करने पहुंचते थे और हजारों दर्शकों की तालियों से पूरा स्टेडियम गूंज उठता था, वही अब कोयलांचल बिश्रामपुर का ऐतिहासिक एकता स्टेडियम आज बदहाली के दौर से गुजर रहा है। वर्षों तक क्षेत्र की खेल पहचान और कोयलांचल की फुटबॉल संस्कृति का केंद्र रहे इस मैदान की वर्तमान स्थिति खेलप्रेमियों के लिए चिंता का विषय बन गई है।स्टेडियम की दर्शक दीर्घा और उसके ऊपर लगे शेड की हालत लगातार खराब होती जा रही है। कई स्थानों पर शेड उखड़ चुका है, जबकि गैलरी के कई हिस्से जर्जर हो ढहने के कगार पर पहुंच चुके हैं। बारिश और मौसम की मार के कारण स्थिति और खराब होने की आशंका है। खेलप्रेमियों का कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत और रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले दिनों में यह समस्या केवल असुविधा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि खिलाड़ियों और दर्शकों की सुरक्षा से भी जुड़ा गंभीर विषय बन सकती है।
बता दें कि
एकता स्टेडियम का इतिहास बिश्रामपुर की खेल विरासत से गहराई से जुड़ा हुआ है। एक दौर ऐसा भी था जब यहां आयोजित होने वाली अखिल भारतीय फुटबॉल प्रतियोगिता पूरे क्षेत्र के लिए किसी उत्सव से कम नहीं होती थीं। अखिल भारतीय गोल्ड कप फुटबॉल प्रतियोगिता जैसे प्रतिष्ठित आयोजनों ने इस मैदान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
इन प्रतियोगिताओं में देश के विभिन्न हिस्सों से खिलाड़ी और टीमें बिश्रामपुर पहुंचती थीं। मुकाबलों के दौरान स्टेडियम में दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ती थी। मैच शुरू होने से काफी पहले ही दर्शक गैलरी में अपनी जगह बना लेते थे। मैदान में खिलाड़ियों की तेज रफ्तार, गोल के लिए संघर्ष और हर शानदार मूव पर दर्शकों की गूंजती तालियां एकता स्टेडियम की पहचान हुआ करती थीं।
पुराने खेलप्रेमियों के मुताबिक, उन दिनों फुटबॉल मैच केवल खेल प्रतियोगिता नहीं होते थे, बल्कि पूरे क्षेत्र के सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाते थे। मैच देखने के लिए बिश्रामपुर के अलावा आसपास के ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते थे। प्रतियोगिताओं के दौरान स्टेडियम और उसके आसपास का पूरा इलाका खिलाड़ियों, दर्शकों और खेल गतिविधियों से गुलजार रहता था।
स्थानीय प्रतिभाओं के लिए रही है बड़ी पाठशाला
एकता स्टेडियम का महत्व केवल बड़े टूर्नामेंटों की मेजबानी तक सीमित नहीं रहा। इस मैदान ने बिश्रामपुर और आसपास के क्षेत्रों के अनेक युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर दिया। कई खिलाड़ियों ने इसी मैदान से अपने खेल जीवन की शुरुआत की।

किसी युवा ने यहीं पहली बार फुटबॉल के जूते पहने तो किसी ने इसी मैदान पर पहला गोल करने का सपना देखा। नियमित अभ्यास और स्थानीय प्रतियोगिताओं के माध्यम से कई खिलाड़ियों ने जिला, संभाग और राज्य स्तर तक अपनी पहचान बनाई। इस लिहाज से एकता स्टेडियम केवल एक खेल मैदान नहीं, बल्कि स्थानीय खेल प्रतिभाओं की पाठशाला भी रहा है।इसी मैदान से कई दौड़ धूप वाले सरकारी नौकरी के लिए युवा सुबह शाम मैदान के कई चक्कर लगा अपने जीवन को संवारा है।
खेलप्रेमियों का कहना है कि यदि इस मैदान में पहले जैसी सुविधाएं उपलब्ध हों और नियमित प्रतियोगिताओं का आयोजन हो तो आज भी यहां से कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी निकल सकते हैं। क्षेत्र में फुटबॉल के प्रति युवाओं का आकर्षण अब भी बना हुआ है, लेकिन पर्याप्त सुविधाओं और बेहतर आधारभूत ढांचे के अभाव में प्रतिभाओं को अपेक्षित अवसर नहीं मिल पा रहा है।
जर्जर गैलरी और उखड़े शेड ने बढ़ाई चिंता
वर्तमान में एकता स्टेडियम की सबसे बड़ी चिंता इसकी दर्शक दीर्घा और शेड को लेकर है। गैलरी के ऊपर लगाए गए शेड के कई हिस्से क्षतिग्रस्त होकर उखड़ चुके हैं। कई स्थानों पर इसकी स्थिति ऐसी दिखाई देती है कि तत्काल मरम्मत की जरूरत महसूस होती है।
दर्शकों को धूप और बारिश से बचाने के उद्देश्य से बनाई गई गैलरी यदि खुद ही जर्जर हो जाए तो स्टेडियम में होने वाले आयोजनों के दौरान दर्शकों को परेशानी होना स्वाभाविक है। बारिश के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो जाती है।
खेलप्रेमियों का कहना है कि स्टेडियम में किसी बड़े फुटबॉल टूर्नामेंट या अन्य आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचते हैं। ऐसे में जर्जर गैलरी और शेड की स्थिति को नजरअंदाज करना उचित नहीं है। प्रबंधन को स्टेडियम का तकनीकी निरीक्षण कराकर यह पता लगाना चाहिए कि किन हिस्सों की तत्काल मरम्मत आवश्यक है और किन हिस्सों का नए सिरे से निर्माण किया जाना जरूरी है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बिश्रामपुर का एकता स्टेडियम शहर की वर्षों पुरानी खेल पहचान का हिस्सा है। यहां आयोजित होने वाले बड़े आयोजनों ने बिश्रामपुर को खेल के नक्शे पर पहचान दिलाई थी।
लेकिन समय के साथ रखरखाव और सुविधाओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिए जाने के कारण स्टेडियम की चमक फीकी पड़ती गई। आज स्थिति यह है कि जिस मैदान में कभी देशभर के खिलाड़ी खेलते थे, उसी की दर्शक दीर्घा और अन्य आधारभूत सुविधाएं जर्जर होती जा रही हैं।
खेलप्रेमियों का कहना है कि किसी भी खेल मैदान का महत्व केवल उसके वर्तमान उपयोग से तय नहीं किया जा सकता। उसके साथ जुड़ी ऐतिहासिक विरासत, स्थानीय खिलाड़ियों की यादें और भविष्य की संभावनाएं भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।
बड़े आयोजनों के लिए फिर विकसित हो सकता है स्टेडियम
यदि एकता स्टेडियम का व्यापक स्तर पर जीर्णोद्धार किया जाए तो इसे दोबारा जिला ही नहीं, बल्कि संभाग और राज्य स्तर के बड़े खेल आयोजनों के लिए विकसित किया जा सकता है।
इसके लिए मैदान की स्थिति सुधारने के साथ-साथ दर्शक दीर्घा, शेड, खिलाड़ियों के लिए चेंजिंग रूम, पेयजल, शौचालय, प्रकाश व्यवस्था, बैठने की व्यवस्था, सुरक्षा और अन्य आवश्यक सुविधाओं को बेहतर बनाने की जरूरत है। नियमित खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन से स्थानीय खिलाड़ियों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा।
खेलप्रेमियों का मानना है कि यदि स्टेडियम को व्यवस्थित तरीके से विकसित किया जाए तो यह बिश्रामपुर और आसपास के क्षेत्रों के युवाओं के लिए एक प्रमुख खेल केंद्र बन सकता है। फुटबॉल के साथ अन्य खेल गतिविधियों को भी यहां बढ़ावा दिया जा सकता है
मैदान बचाइए, प्रतिभाओं का भविष्य बचाइए
खेलप्रेमियों का कहना है कि एकता स्टेडियम को केवल एक पुराने मैदान के रूप में देखना इसकी ऐतिहासिक भूमिका को कमतर आंकना होगा।
आज जरूरत है कि इस विरासत को संरक्षित किया जाए। यदि समय रहते स्टेडियम के जीर्णोद्धार की दिशा में कदम उठाए जाते हैं तो न केवल पुरानी खेल पहचान वापस लाई जा सकती है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए भी बेहतर मंच तैयार किया जा सकता है।
स्थानीय खेलप्रेमियों ने जिला प्रशासन और कॉलरी प्रबंधन से एकता स्टेडियम को फिर से सवार जिला स्तर का फुटबॉल मैदान तैयार कर कैलेंडर के हिसाब से वर्ष भर फुटबॉल सहित खेलकूद के विविध आयोजन कर युवा प्रतिभाओं को तराशने उन्हें मंच उपलब्ध कराने की मांग की हैऔर कहा है कि कोयलांचल के युवा तेजी से पनप रहे नशे की लत की ओर अग्रसर हैं ,अभी भी समय है युवाओं को खेलकूद की गतिविधियों से जोड़ उनका जीवन संवारा जा सकता है।










