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Bureau Report
बिश्रामपुर। श्रावण मास के तीसरे सोमवार एवं नागपंचमी के पावन अवसर पर कोयलांचल क्षेत्र भगवान भोलेनाथ की भक्ति में सराबोर नजर आया। विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल एवं दुर्गा वाहिनी के संयुक्त तत्वावधान जीमें प्रतिवर्ष की परंपरा के अनुरूप इस वर्ष भी भव्य कांवर यात्रा निकाली गई। यात्रा में बड़ी संख्या जिले भर से श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया और भगवान शिव का जलाभिषेक कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।कांवर यात्रा की शुरुआत रेण नदी तट से हुई। यहां श्रद्धालुओं ने विधिवत पूजा-अर्चना कर मां रेणुका नदी का स्मरण किया और पवित्र जल कांवर में भरा। इसके बाद कांवरिए भगवान भोलेनाथ के जयकारे लगाते हुए केनापारा स्थित रामेश्वरम शिव मंदिर के लिए रवाना हुए। यात्रा के दौरान पूरे मार्ग में हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष गूंजते रहे।
आयोजन को आकर्षक एवं भक्तिमय बनाने के लिए समिति द्वारा विशेष तैयारियां की गई थीं। यात्रा में
भगवान भोलेनाथ के विभिन्न स्वरूपों एवं कलाओं का प्रदर्शन किया गया। धूमाल की व्यवस्था भी की गई थी। धार्मिक उत्साह, आकर्षक सजावट और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण कांवर यात्रा ने भव्य धार्मिक उत्सव का रूप ले लिया।
भगवान भोलेनाथ के विभिन्न स्वरूपों एवं कलाओं का प्रदर्शन किया गया। धूमाल की व्यवस्था भी की गई थी। धार्मिक उत्साह, आकर्षक सजावट और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण कांवर यात्रा ने भव्य धार्मिक उत्सव का रूप ले लिया।एनएच-43 पर यात्रा मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए स्थानीय लोगों ने व्यवस्था की थी। कांवरियों को पेयजल, प्रसाद एवं अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। कई स्थानों पर भंडारे का आयोजन भी किया गया, जहां कांवरियों सहित आम श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। स्थानीय लोगों ने पुष्पवर्षा और जयकारों के साथ कांवरियों का स्वागत किया।
लंबी यात्रा पूरी करने के बाद कांवरिए केनापारा स्थित रामेश्वरम शिव मंदिर पहुंचे। यहां श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया और क्षेत्र में शांति, सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। मंदिर परिसर में भी पूरे समय भक्तिमय वातावरण बना रहा।
कांवर यात्रा में युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। श्रावण मास, सोमवार और नागपंचमी के पावन संयोग के कारण इस धार्मिक आयोजन को लेकर कोयलांचल क्षेत्र में सुबह से ही विशेष उत्साह और आस्था का माहौल रहा।










