बलरामपुर, / सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत सेवा और समर्पण भाव के साथ जिले में शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम छोर पर बसे हितग्राहियों तक पहुंचाया जा रहा है। इसी कड़ी में दूरस्थ पहाड़ी कोरवा बसाहटों में पी.एम. जनमन योजना बदलाव की नई कहानी लिख रही है। योजना के तहत बने बहुउद्देशीय केंद्रों ने विशेष पिछड़ी जनजाति के परिवारों तक स्वास्थ्य और पोषण की सुविधाएं उनके घर के पास पहुंचा दी हैं।
कुछ समय पहले तक इन दुर्गम बसाहटों में रहने वाले परिवारों के लिए सामान्य उपचार, स्वास्थ्य जांच या बच्चों के पोषण आहार जैसी बुनियादी सेवाएं पाना भी आसान नहीं था। इनके लिए उन्हें गांव से दूर जाना पड़ता था, जिससे कई बार समय पर इलाज और देखभाल नहीं मिल पाती थी। इस स्थिति को बदलने के लिए आदिम जाति विकास विभाग द्वारा पी.एम. जनमन योजना के तहत ऐसे बहुउद्देशीय केंद्रों का निर्माण कराया जा रहा है, जहां एक ही परिसर में उप स्वास्थ्य केंद्र, आंगनबाड़ी केंद्र और सामुदायिक गतिविधियों की सुविधा उपलब्ध हो। जिले में कुल 09 बहुउद्देशीय केंद्र भवन
स्वीकृत हैं, जिनमें से 02 का निर्माण पूर्ण कर सेवाएं शुरू कर दी गई हैं।
विकासखंड कुसमी की ग्राम पंचायत चम्पानगर (भुलसीखुर्द) के अंतर्गत पहाड़ी कोरवा बसाहट ढोढ़ाचॉपी (कोरवापारा) में विशेष पिछड़ी जनजाति के 75 लोग निवासरत हैं। यहां बहुउद्देशीय केंद्र बनने के बाद गांव में ही उप स्वास्थ्य केंद्र और आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं। उप स्वास्थ्य केंद्र से अब तक 183 से अधिक ग्रामीण स्वास्थ्य जांच और उपचार का लाभ ले चुके हैं, जबकि आंगनबाड़ी केंद्र के माध्यम से 11 बच्चों और माताओं को पोषण आहार सहित अन्य सेवाएं नियमित रूप से मिल रही हैं।
इसी तरह विकासखंड शंकरगढ़ की ग्राम पंचायत पोंड़ीखुर्द की पहाड़ी कोरवा बसाहट आमाकोना में 86 पीवीटीजी हितग्राही निवासरत हैं। बहुउद्देशीय केंद्र शुरू होने से यहां के ग्रामीणों को अब स्वास्थ्य और आंगनबाड़ी सेवाओं के लिए दूर नहीं जाना पड़ता। उप स्वास्थ्य केंद्र से अब तक 39 हितग्राहियों को स्वास्थ्य सेवाएं मिली हैं और 06 हितग्राही नियमित रूप से आंगनबाड़ी सुविधाओं से लाभान्वित हो रहे हैं।
गांव की दहलीज पर पहुंची ये सुविधाएं पहाड़ी कोरवा परिवारों के जीवन में भरोसा और सुरक्षा का नया भाव जगा रही हैं। पी.एम. जनमन के ये बहुउद्देशीय केंद्र इस बात का प्रमाण हैं कि जब सेवा और समर्पण के साथ योजनाएं अंतिम छोर तक पहुंचती हैं, तो सबसे दूरस्थ समुदाय भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ते हैं।









