ओड़गी। सूरजपुर जिले के ओड़गी थाना क्षेत्र में नाबालिगों के हाथों में ट्रैक्टर और जेसीबी जैसी भारी मशीनों की कमान दिखाई देना यातायात सुरक्षा और नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। क्षेत्र में नाबालिगों द्वारा भारी वाहन चलाए जाने की तस्वीरें सामने आने के बाद यह सवाल उठने लगा है कि आखिर जिम्मेदारों की नजरों के सामने इस तरह नियमों की अनदेखी कैसे हो रही है। बताया जा रहा है कि नाबालिग के वाहन चलाने से जुड़ी एक घटना पहले भी सामने आ चुकी है, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है।भारी वाहन चलाना अनुभव, प्रशिक्षण और जिम्मेदारी से जुड़ा काम है। ट्रैक्टर और जेसीबी जैसी मशीनों का संचालन करते समय छोटी-सी चूक भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। ऐसे में यदि नाबालिग इन वाहनों को सार्वजनिक सड़कों या आबादी वाले क्षेत्रों
में चलाते दिखाई दे रहे हैं, तो यह बच्चों के साथ-साथ राहगीरों और अन्य वाहन चालकों की सुरक्षा के लिए भी चिंता का विषय है।एक घटना सामने आने के बाद भी यदि ऐसी स्थिति बनी हुई है, तो संबंधित विभागों की निगरानी और रोकथाम के प्रयासों की समीक्षा जरूरी हो जाती है। सवाल यह है कि क्या संभावित दुर्घटनाओं को रोकने के लिए समय रहते जांच और कार्रवाई की जाएगी, या फिर किसी बड़ी घटना के बाद ही जिम्मेदारों की नींद खुलेगी?
00वाहन मालिकों की जिम्मेदारी कौन तय करेगा?
नाबालिगों के हाथों में भारी वाहनों की कमान पहुंचने के पीछे वाहन मालिकों और अभिभावकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। वाहन किसे सौंपा जा रहा है, चालक के पास वैध लाइसेंस है या नहीं और वाहन का उपयोग किन परिस्थितियों में किया जा रहा है, इसकी जिम्मेदारी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
मोटर वाहन अधिनियम के तहत निर्धारित आयु और वैध ड्राइविंग लाइसेंस संबंधी नियमों का पालन आवश्यक है। नाबालिगों को वाहन चलाने देना परिस्थितियों के अनुसार वाहन मालिक या अभिभावक के लिए भी कानूनी परेशानी का कारण बन सकता है। इसलिए संबंधित मामलों की जांच कर नियमों के उल्लंघन की स्थिति में नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की जरूरत है।इस संबंध में ओड़गी थाना प्रभारी अलरिक लकड़ा से जानकारी लेने के लिए फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया। हालांकि, उनसे बातचीत नहीं हो सकी। ऐसे में इस मामले में पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आ पाया है।










