राजस्व अभिलेखों में कूटरचना कर शासकीय भूमि को निजी नाम पर दर्ज कराने का आरोप, कलेक्टर अजीत वसंत ने दिए कार्रवाई के निर्देश
अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थल मैनपाट में शासकीय जमीन की कथित हेराफेरी का मामला सामने आया है। सरगुजा जिले के ग्राम केसरा में 3.46 हेक्टेयर सरकारी भूमि को राजस्व अभिलेखों में कूटरचना कर निजी नाम पर दर्ज कराने और बाद में उसकी रजिस्ट्री किए जाने के मामले में कलेक्टर अजीत वसंत ने पांच लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। आरोपितों में आजाद इराकी का नाम भी शामिल है।
मामला साम
ने आने के बाद राजस्व विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। प्रशासन ने संबंधित राजस्व अभिलेखों में की गई कथित अवैध प्रविष्टि को हटाने के निर्देश भी दिए हैं।
भाजपा पार्षद की शिकायत पर शुरू हुई जांच
ग्राम केसरा की शासकीय भूमि के मामले में अंबिकापुर के भाजपा पार्षद आलोक दुबे ने कलेक्टर से शिकायत की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि मैनपाट तहसील के अंतर्गत आने वाली रिनम्बरिंग खसरा नंबर 1378, जिसका रकबा 3.46 हेक्टेयर है, को राजस्व अभिलेखों में कथित कूटरचना के माध्यम से निजी व्यक्ति के नाम पर दर्ज करा लिया गया। इसके बाद जमीन की रजिस्ट्री दूसरे निजी व्यक्तियों के पक्ष में कर दी गई।
शिकायत मिलने के बाद कलेक्टर ने मामले को समय-सीमा में दर्ज कर तहसीलदार मैनपाट से जांच प्रतिवेदन मांगा। जांच में राजस्व अभिलेखों से संबंधित गंभीर अनियमितताएं सामने आने की बात कही गई है।
1954-55 के रिकॉर्ड में नहीं था खसरा नंबर 1378
तहसीलदार की जांच रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 1954-55 के अधिकार अभिलेख में अंतिम खसरा नंबर 650 था। ऐसे में उस समय के मूल अभिलेख में खसरा नंबर 1378 की
प्रविष्टि होने का सवाल नहीं उठता। जांच में यह भी सामने आया कि खसरा नंबर 1378 रिनम्बरिंग के बाद अस्तित्व में आया और पहली बार वर्ष 1995-96 के राजस्व दस्तावेजों में दर्ज हुआ।
प्रशासन के अनुसार, पुराने अधिकार अभिलेख में बाद में कूटरचना कर खसरा नंबर 1378 को विजय सिंह पिता चंद्रचरण सिंह, निवासी धरमजयगढ़ के नाम पर दर्ज किए जाने की बात सामने आई है। इसके बाद संबंधित भूमि की रजिस्ट्री आजाद इराकी और अनुपम कुमार सिंह के पक्ष में किए जाने का उल्लेख जांच में किया गया है।
क्रेता-विक्रेताओं के विरुद्ध FIR के निर्देश
जांच रिपोर्ट में विजय सिंह के मुख्तार आम दिलीप चिकवा, निवासी गिरहुलडीह, सीतापुर तथा तुलेश्वर गुप्ता, निवासी अलोला, धरमजयगढ़ के नाम भी सामने आए हैं। मामले में आजाद इराकी पिता रियाजुद्दीन इराकी, निवासी जयनगर तथा अनुपम कुमार सिंह पिता रामाशंकर सिंह, निवासी माइनस कॉलोनी, विश्रामपुर का भी उल्लेख है।
प्रशासन ने मामले में कुल पांच क्रेता-विक्रेताओं के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध आपराधिक आरोपों का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
वन भूमि के हस्तांतरण के नियमों का भी मामला
जांच में वर्ष 1995-96 के बंदोबस्त अभिलेख में संबंधित खसरा नंबर को छोटे झाड़ जंगल मद की शासकीय भूमि के रूप में दर्ज पाए जाने का उल्लेख है। प्रशासन ने वन भूमि के हस्तांतरण से जुड़े कानूनी प्रावधानों और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का हवाला देते हुए मामले को गंभीर माना है।
इसके साथ ही राजस्व अधिकारियों को अभिलेखों में की गई कथित अवैध प्रविष्टि को विलोपित करने की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
आजाद इराकी का नाम पहले भी आ चुका है चर्चा में
आजाद इराकी का नाम इससे पहले भी जमीन से जुड़े विवादों में सामने आ चुका है। ख
बर के अनुसार, अंबिकापुर में रिंग बांध के पास जमीन की खरीद-बिक्री के बाद कथित रूप से जमीन पाटने के प्रयास को लेकर विवाद हुआ था। इस दौरान नगर निगम के कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगे थे। मामले में उसके विरुद्ध केस दर्ज कराया गया था।
इससे पहले जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े एक अन्य मामले में भी कार्रवाई की गई थी। अब मैनपाट के ग्राम केसरा में शासकीय भूमि से संबंधित नया मामला सामने आया है। जमीन की कथित हेराफेरी से जुड़ी अन्य शिकायतें भी जांच के दायरे में होने की बात कही गई है।










