भैयाथान। विकासखंड अंतर्गत खुटरापारा स्थित गोबरी नदी पर आवागमन बहाल करने के लिए शासन-प्रशासन द्वारा लगभग 15 लाख रुपये
की लागत से बनाया गया अस्थायी रपटा पहली बरसात में ही जवाब दे गया। तेज बारिश के बाद एक हिस्सा टूट गया और रपटे के ऊपर से पानी बहने लगा जिससे आवागमन एक बार फिर बाधित हो गया। इसके साथ ही डबरीपारा, बासापारा, गंगोटी, खुटरापारा समेत दर्जनों गांवों के हजारों ग्रामीणों और राहगीरों की परेशानी फिर वहीं आकर खड़ी हो गई, जहां पिछले वर्ष थी।दरअसल, पिछले वर्ष भारी बारिश के दौरान गोबरी नदी पर बने पुराने पुल का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था। पुल टूटने के बाद क्षेत्र में आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो गया और इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस के बीच जमकर राजनीतिक बयानबाजी भी हुई। इसके बाद प्रदेश की महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री एवं भटगांव विधायक लक्ष्मी राजवाड़े ने कार्यकर्ताओं के साथ मौके का निरीक्षण किया और आवागमन बहाल करने के लिए अस्थायी रपटा निर्माण का निर्णय लिया गया। प्रशासन ने करीब 15 लाख रुपये खर्च कर रपटा तो बना दिया, लेकिन यह नहीं सोचा गया कि बरसात के तेज बहाव में यह व्यवस्था कितने दिन टिक पाएगी। बरसात शुरू होते ही रपटे की एप्रोच सड़क कीचड़ में तब्दील हो गई और वाहन तो दूर, पैदल चलना भी मुश्किल हो गया। लोगों को रोजाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
स्थिति तब और दिलचस्प हो गई, जब क्षेत्र के ग्रामीणों ने प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए खुद चंदा इकट्ठा कर एप्रोच सड़क बनवाने की मुहिम शुरू कर दी। ग्रामीणों की इस अनोखी पहल के बाद विभाग हरकत में आया और एप्रोच सड़क पर जीएसबी डस्ट डालकर किसी तरह आवागमन चालू कराया गया।लेकिन अब पहली ही तेज बरसात में अस्थायी रपटा भी पानी के तेज बहाव के सामने टिक नहीं सका। रपटे के ऊपर से पानी बह रहा है और आवागमन फिर से ठप हो गया है। ऐसे में ग्रामीणों का कहना है कि लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सका।क्षेत्र के कई जानकारों का भी मानना है कि यदि 15 लाख रुपये पुराने पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत पर खर्च किए जाते तो संभवतः यह समस्या दोबारा नहीं आती। उनका कहना है कि अस्थायी व्यवस्था पर खर्च
करने के बजाय स्थायी समाधान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी।
00 रपटा निर्माण के निर्णय पर सवाल…..
जिला पंचायत सदस्य अखिलेश प्रताप सिंह ने कहा कि क्षेत्र की विधायक प्रदेश सरकार में मंत्री हैं, इसलिए उनसे स्थायी समाधान की उम्मीद थी, लेकिन 15 लाख रुपये खर्च कर अपनी मानसिकता एक पंचायत के सचिव के समान माना जा रहा है। यदि यही राशि गोबरी नदी के पुराने पुल की मरम्मत पर खर्च होती, तो लोगों को स्थायी राहत मिलती। जिसका खामियाजा आज जनता भुगत रही है।
जनपद सदस्य राजू गुप्ता ने कहा कि उन्हें पहले से ही आशंका थी कि अस्थायी रपटा बरसात का दबाव नहीं झेल पाएगा। इसलिए उन्होंने शासन-प्रशासन को आवेदन देकर गोबरी नदी पर स्थायी पुल निर्माण की मांग की थी। उनका कहना है कि नए रपटे के निर्माण की अपेक्षा पुराने पुल की मरम्मत अधिक उपयोगी और कम खर्चीला विकल्प साबित हो सकता था।
मंडल अध्यक्ष सुनील साहू ने कहा गोबरी नदी पर बनी बड़ी पुल की क्षतिग्रस्त होने के बाद जनसुविधाओं को देखते हुए रपटा पुल का निर्माण कराया गया था। पहली बरसात में पुल का टूट जाना समझ से परे है इसमें प्रशासनिक विभाग के अधिकारियो कि जिम्मेदारी तय कि जाएगी।अब एक बार फिर गोबरी नदी पर आवागमन बाधित होने से दर्जनों ग्राम पंचायतों के लोगों को रोजमर्रा के कार्यों, शिक्षा, स्वास्थ्य और बाजार आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। स्थानीय लोग प्रशासन से जल्द स्थायी पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं, ताकि हर बरसात में यही संकट दोहराने की नौबत न आए।










