सूरजपुर। कलेक्टर के निर्देशानुसार विद्यालयों में “बैगलेस डे” के अवसर पर शिक्षक, विद्यार्थियों एवं पालकों की सहभागिता से शाला परिसर में
स्वच्छता अभियान आयोजित किए जाने के आदेश का संयुक्त शिक्षक संघ ने स्वागत किया है।संघ ने कहा कि विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व की सीख देने का भी माध्यम हैं। ऐसे में विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों की संयुक्त भागीदारी से विद्यालय परिसर की स्वच्छता, पौधों की देखभाल, अनुपयोगी सामग्री का निष्पादन तथा स्वच्छ वातावरण के निर्माण जैसे कार्य निश्चित रूप से बच्चों में श्रमदान, अनुशासन, स्वच्छता एवं सामूहिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करेंगे।दरअसल जिले के अनेक प्राथमिक/माध्यमिक/हाई स्कूल में भृत्य की अनुपलब्धता के कारण विद्यालय में साफ सफाई का संकट गहराते जा रहा था, विद्यालय में गंदगी पाए जाने पर उच्च अधिकारी संस्था प्रमुख पर अनुशासनात्मक कार्यवाही करते और बच्चों के सहयोग से साफ सफाई कराने का फोटो वायरल होने पर भी शिक्षकों पर दण्डात्मक कार्यवाही सुनिश्चित होती। इस समस्या के स्थाई समाधान हेतु संयुक्त शिक्षा संघ के
जिलाध्यक्ष सचिन त्रिपाठी ने पिछली परामर्शदात्री समिति की बैठक में कलेक्टर से आग्रह किया था।कुछ दिनों पूर्व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्य नाथ योगी जी ने भी बच्चों के श्रमदान के माध्यम से शाला प्रांगण की साफ सफाई में सहयोग लेने की सीख देते हुवे पुरातन गुरुकुल व्यवस्था का स्मरण कराया था ।
संयुक्त शिक्षक संघ के ब्लॉक अध्यक्ष राजकुमार सिंह प्रतापपुर, कृष्णा सोनी सूरजपुर, पुष्पराज पाण्डेय प्रेमनगर,मोहम्मद महमूद, प्रमोद पाठक ओड़गी, कुलदीप सिंह भैयाथान, राधेश्याम साहू रामानुजनगर, ने कहा कि यदि इस प्रकार के कार्यक्रम शिक्षकों पर अतिरिक्त प्रशासनिक बोझ डाले बिना, पर्याप्त संसाधनों एवं जनसहभागिता के साथ सदैव आयोजित किए जाएं तो यह शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता का भी उत्कृष्ट उदाहरण बनेंगे। संघ ने विश्वास व्यक्त किया कि इस पहल से विद्यालयों का वातावरण और अधिक स्वच्छ, सुंदर एवं प्रेरणादायी बनेगा, अब भयमुक्त होकर शिक्षक, छात्र छात्राओ के सहयोग से विद्या के मंदिर को और अधिक स्वच्छ रख सकेंगे।संघ ने जिले के कलेक्टर द्वारा शिक्षा एवं स्वच्छता के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों की सराहना करते हुए कहा कि विद्यालयों को स्वच्छ एवं आकर्षक बनाने के लिए समाज, पालकों और शिक्षकों का सामूहिक प्रयास अत्यंत आवश्यक है।










