प्रतापपुर। प्रतापपुर वन परिक्षेत्र में जंगली हाथियों की लगातार बढ़ती सक्रियता से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। आज कनकनगर–
चिटकाबहरा मार्ग पर एक जंगली हाथी ने अचानक बाइक सवार युवक परिवार पर हमला कर दिया। युवक ने सूझबूझ का परिचय देते हुए बाइक छोड़कर भागकर अपनी जान बचा ली, जबकि गुस्साए हाथी ने बाइक को सूंड और पैरों से पटक-पटककर बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार युवक कनकनगर से चिटकाबहरा की ओर जा रहा था। इसी दौरान सड़क किनारे मौजूद हाथी अचानक आक्रामक हो गया और तेज़ी से उसकी ओर दौड़ पड़ा। युवक ने खतरे को भांपते हुए तत्काल बाइक छोड़ दी और सुरक्षित स्थान की ओर भाग निकला। कुछ देर तक हाथी सड़क पर उत्पात मचाता रहा, जिससे मार्ग पर आवागमन पूरी तरह प्रभावित रहा और लोगों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में कई दिनों से हाथियों की आवाजाही लगातार बनी हुई है। कभी हाथी सड़क पर दिखाई देते हैं, तो कभी गांवों में घुस जाते हैं। कई बार खेतों में पहुंचकर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं और राहगीरों के पीछे भी दौड़ पड़ते हैं। बरसात के मौसम में हाथियों की गतिविधियां बढ़ने से ग्रामीण भय और आतंक के साये में जीवन जीने को मजबूर हैं। शाम होते ही लोग घरों से निकलने में डर महसूस कर रहे हैं।
घटना की सूचना मिलने के बाद वन विभाग, वनरक्षक और हाथी मित्र दल की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने आसपास के लोगों को सुरक्षित दूरी
बनाए रखने की सलाह दी तथा हाथी की गतिविधियों पर निगरानी शुरू की। कुछ समय बाद हाथी वापस जंगल की ओर लौट गया, जिसके बाद मार्ग पर आवागमन बहाल हो सका।
ग्रामीणों का आरोप है कि हाथियों की मौजूदगी की समय पर जानकारी नहीं मिलने से लोग अनजाने में खतरे वाले क्षेत्रों से गुजर जाते हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते सूचना और सतर्कता व्यवस्था मजबूत हो, तो इस तरह की घटनाओं से बचा जा सकता है। लोगों ने वन विभाग से प्रभावित क्षेत्रों में नियमित निगरानी, मुनादी, गश्त और त्वरित अलर्ट व्यवस्था लागू करने की मांग की है।
वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि हाथी दिखाई देने पर उसके पास न जाएं, उसे उकसाने का प्रयास न करें, अकेले यात्रा करने से बचें तथा किसी भी आपात स्थिति में तत्काल वन विभाग या हाथी मित्र दल को सूचना दें।
उल्लेखनीय है कि सूरजपुर जिले के प्रतापपुर क्षेत्र में पिछले कुछ समय से जंगली हाथियों की सक्रियता लगातार बढ़ी है। ऐसे में मानव–हाथी संघर्ष को रोकना, ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और समय पर सूचना तंत्र को प्रभावी बनाना वन विभाग और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। लगातार सामने आ रही घटनाओं ने ग्रामीणों की चिंता और प्रशासन की जिम्मेदारी दोनों को बढ़ा दिया है।










