सीतापुर। नगर पंचायत सीतापुर में करीब नौ माह बाद आयोजित परिषद की बैठक में मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) की कार्यप्रणाली को लेकर जमकर नाराजगी देखने को मिली। बैठक में नगर पंचायत अध्यक्ष एवं सभी पार्षदों ने सर्वसम्मति से सीएमओ के विरुद्ध निंदा प्रस्ताव पारित करते हुए उनके कार्यों की जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, विगत नौ माह से नगर पंचायत परिषद की बैठक आयोजित नहीं होने के कारण कई विकास कार्य प्रभावित हो रहे थे। परिषद सदस्यों द्वारा लगातार बैठक बुलाने की मांग किए जाने के बावजूद बैठक आयोजित नहीं किए जाने से जनप्रतिनिधियों में असंतोष व्याप्त था। बताया जा रहा है कि परिषद की बैठक आयोजित न हो, इसके लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास भी किए गए, लेकिन अंततः जिला कलेक्टर के निर्देश पर सीतापुर तहसीलदार की उपस्थिति में बैठक संपन्न हुई।
बैठक के दौरान नगर पंचायत क्षेत्र के विकास कार्यों, जनसमस्याओं, लंबित योजनाओं एवं प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। परिषद सदस्यों ने आरोप लगाया कि सीएमओ द्वारा परिषद की उपेक्षा करते हुए मनमाने ढंग से कार्य किया जा रहा है, जिससे विकास कार्यों के संचालन और जनहित से
जुड़े निर्णयों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
नगर पंचायत अध्यक्ष एवं पार्षदों ने कहा कि वे सीएमओ की कार्यप्रणाली से संतुष्ट नहीं हैं। उनका आरोप है कि जनप्रतिनिधियों को विश्वास में लिए बिना प्रशासनिक निर्णय लिए जा रहे हैं, जिसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। बैठक में सर्वसम्मति से निंदा प्रस्ताव पारित करते हुए यह निर्णय लिया गया कि मामले की लिखित शिकायत सरगुजा कलेक्टर को सौंपी जाएगी तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की जाएगी।
बैठक में नगर की विभिन्न समस्याओं के निराकरण, लंबित विकास कार्यों को गति देने एवं नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने से संबंधित कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी पारित किए गए। परिषद सदस्यों ने नगर के समग्र विकास के लिए प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय एवं नियमित परिषद बैठकों की आवश्यकता पर जोर दिया।
वहीं, मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताते हुए स्वयं को निर्दोष बताया है। उनका कहना है कि उनके विरुद्ध लगाए गए आरोप तथ्यहीन हैं और वे नियमानुसार अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।









