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Bureau Report
बिश्रामपुर। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत संचालित महिला सशक्तिकरण और स्व-सहायता समूहों की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे
हैं। सूरजपुर जिले के ग्राम पंचायत सिलफिली क्षेत्र की राधा महिला कलस्टर संगठन की बैंक सखी अर्चना मंडल एवं संगठन की कई महिलाओं ने कलेक्टर को कई लिखित शिकायतें सौंपते हुए ब्लॉक प्रोजेक्ट मैनेजर और पीआरपी पर गंभीर अनियमितताओं, पक्षपात, मानदेय में कटौती, वित्तीय गड़बड़ियों, महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार तथा योजनाओं के संचालन में मनमानी करने के आरोप लगाए हैं। लगातार सामने आई शिकायतों ने महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतों में महिलाओं ने निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। बैंक सखी अर्चना मंडल ने आवेदन में आरोप लगाया है कि वर्ष 2024-25 के दौरान नियमित रूप से कार्य करने के बावजूद उनका मानदेय काट दिया गया। उनका आरोप है कि बार-बार अधिकारियों से संपर्क करने के बाद भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उल्टा उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया। महिला क्लस्टर संगठन की सदस्यों ने आरोप लगाया है कि बैठकों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया
का पालन नहीं किया जाता। कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव बिना सदस्यों की सहमति के पारित कर दिए जाते हैं। विरोध करने वाली महिलाओं की बातों को नजरअंदाज कर दिया जाता है और निर्णय पहले से तय कर लिए जाते हैं। महिलाओं का कहना है कि संगठन का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में उनकी आवाज को दबाया जा रहा है। शिकायतों में व्हीपीआरपी सर्वे को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कई पात्र परिवारों का सर्वे नहीं किया गया, जबकि कुछ अपात्र लोगों के नाम जोड़े गए। सर्वे प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और कई मामलों में बिना वास्तविक सत्यापन के कार्य पूर्ण दिखा दिया गया। आरोप यह भी लगाया गया है कि सर्वे के नाम पर राशि की मांग की गई तथा योजना का लाभ दिलाने के नाम पर महिलाओं को भ्रमित किया गया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि जब उन्होंने अनियमितताओं का विरोध किया तो उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। उन्हें बैठकों में अपमानित किया गया तथा शिकायत वापस लेने के लिए मानसिक दबाव बनाया गया। कुछ महिलाओं ने अधिकारियों के व्यवहार को महिला सम्मान के विपरीत बताते हुए कार्रवाई की मांग की है। महिलाओं का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा महिला स्व-सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। यदि योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता नहीं होगी और जिम्मेदार अधिकारी मनमानी करेंगे, तो इसका सीधा नुकसान ग्रामीण महिलाओं और योजना की विश्वसनीयता को होगा। बैंक सखी अर्चना मंडल ने यह भी आरोप लगाया कि कलस्टर संगठन में कई ऐसे लोग हैं जो नियम विरुद्ध तरीके से तीन तीन पद पर कार्यरत रहकर अनुचित तरीके से शासकीय राशि प्राप्त कर रहे हैं। महिला समूहों की कई महिलाओं को समय पर राशि भी प्राप्त नहीं हो पा रही है। बैंक सखी अर्चना मंडल ने मांग किया है कि कलस्टर के वर्ष 2021-2026 तक आय व्यय की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई की जाए।
हैं। सूरजपुर जिले के ग्राम पंचायत सिलफिली क्षेत्र की राधा महिला कलस्टर संगठन की बैंक सखी अर्चना मंडल एवं संगठन की कई महिलाओं ने कलेक्टर को कई लिखित शिकायतें सौंपते हुए ब्लॉक प्रोजेक्ट मैनेजर और पीआरपी पर गंभीर अनियमितताओं, पक्षपात, मानदेय में कटौती, वित्तीय गड़बड़ियों, महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार तथा योजनाओं के संचालन में मनमानी करने के आरोप लगाए हैं। लगातार सामने आई शिकायतों ने महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतों में महिलाओं ने निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। बैंक सखी अर्चना मंडल ने आवेदन में आरोप लगाया है कि वर्ष 2024-25 के दौरान नियमित रूप से कार्य करने के बावजूद उनका मानदेय काट दिया गया। उनका आरोप है कि बार-बार अधिकारियों से संपर्क करने के बाद भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उल्टा उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया। महिला क्लस्टर संगठन की सदस्यों ने आरोप लगाया है कि बैठकों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया
का पालन नहीं किया जाता। कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव बिना सदस्यों की सहमति के पारित कर दिए जाते हैं। विरोध करने वाली महिलाओं की बातों को नजरअंदाज कर दिया जाता है और निर्णय पहले से तय कर लिए जाते हैं। महिलाओं का कहना है कि संगठन का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में उनकी आवाज को दबाया जा रहा है। शिकायतों में व्हीपीआरपी सर्वे को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कई पात्र परिवारों का सर्वे नहीं किया गया, जबकि कुछ अपात्र लोगों के नाम जोड़े गए। सर्वे प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और कई मामलों में बिना वास्तविक सत्यापन के कार्य पूर्ण दिखा दिया गया। आरोप यह भी लगाया गया है कि सर्वे के नाम पर राशि की मांग की गई तथा योजना का लाभ दिलाने के नाम पर महिलाओं को भ्रमित किया गया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि जब उन्होंने अनियमितताओं का विरोध किया तो उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। उन्हें बैठकों में अपमानित किया गया तथा शिकायत वापस लेने के लिए मानसिक दबाव बनाया गया। कुछ महिलाओं ने अधिकारियों के व्यवहार को महिला सम्मान के विपरीत बताते हुए कार्रवाई की मांग की है। महिलाओं का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा महिला स्व-सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। यदि योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता नहीं होगी और जिम्मेदार अधिकारी मनमानी करेंगे, तो इसका सीधा नुकसान ग्रामीण महिलाओं और योजना की विश्वसनीयता को होगा। बैंक सखी अर्चना मंडल ने यह भी आरोप लगाया कि कलस्टर संगठन में कई ऐसे लोग हैं जो नियम विरुद्ध तरीके से तीन तीन पद पर कार्यरत रहकर अनुचित तरीके से शासकीय राशि प्राप्त कर रहे हैं। महिला समूहों की कई महिलाओं को समय पर राशि भी प्राप्त नहीं हो पा रही है। बैंक सखी अर्चना मंडल ने मांग किया है कि कलस्टर के वर्ष 2021-2026 तक आय व्यय की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई की जाए।शिकायत की जांच कराई जाएगी
शिकायत मिली है। शिकायत की जांच कराई जाएगी और जो भी जांच रिपोर्ट आएगा, उसी के अनुसार कार्यवाही की जाएगी।
रेना जमील
कलेक्टर सुरजपुर










