गिट्टी और निर्माण सामग्री ढो रहे ट्रैक्टर-ट्रॉली की आवाजाही से बढ़ा खतरा, चालकों के लाइसेंस और वाहनों के दस्तावेजों की जांच पर उठे सवाल
सूरजपुर। खेती-किसानी के लिए उपयोग होने वाले ट्रैक्टर अब जिले की सड़कों पर गिट्टी और निर्माण सामग्री ढोते नजर आ रहे हैं। इन वाहनों की तेज और लापरवाह आवाजाही आम लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बनती जा रही है। कई चालकों के अनुभव और वैध ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पिछले दो दिनों में ट्रैक्टर हादसों में 13 वर्षीय छात्रा रिद्धिमा जैन और चंद्रावती जायसवाल की मौत ने सड़क सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है।
दो दर्द
नाक हादसों ने दो परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। इसके साथ ही परिवहन विभाग, यातायात पुलिस, खनिज विभाग और स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। आखिर सड़कों पर दौड़ रहे इन वाहनों के दस्तावेजों, चालकों के लाइसेंस और परिवहन संबंधी नियमों की नियमित जांच क्यों नहीं हो रही है?
गिट्टी और निर्माण सामग्री के परिवहन में बढ़ा इस्तेमाल
ट्रैक्टर मूल रूप से कृषि कार्यों के लिए बनाए जाते हैं, लेकिन जिले में इनका इस्तेमाल गिट्टी, रेत और अन्य निर्माण सामग्री ढोने में भी हो रहा है। भारी सामग्री से लदी ट्रैक्टर-ट्रॉली को नियंत्रित करने के लिए चालक का अनुभवी और यातायात नियमों से परिचित होना जरूरी है।
इसके बावजूद यदि बिना वैध लाइसेंस या आवश्यक पात्रता के चालक वाहन चला रहे हैं, तो यह सड़क पर चलने वाले दूसरे लोगों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। ऐसे वाहनों की नियमित जांच और नियमों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है।
स्कूल से लौट रही छात्रा की ट्रैक्टर की चपेट में आने से मौत
शुक्रवार को विश्रामपुर क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग-43 पर ग्राम पंचायत केशवनगर के बड़कापारा में दर्दनाक हादसा हुआ। 13 वर्षीय रिद्धिमा जैन अपने पिता पंकज कुमार जैन के साथ स्कूल में आयोजित पैरेंट्स मीटिंग से बाइक पर घर लौट रही थी।
दोपहर करीब 12 बजे गिट्टी लदे ट्रैक्टर को पार करते समय टक्कर हुई। इससे छात्रा सड़क पर गिर गई और ट्रैक्टर के पहिए की चपेट में आ गई। हादसे में उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त ट्रैक्टर जब्त कर जांच शुरू की।
कुबेरपुर में महिला की मौत के बाद चक्काजाम
दूसरे दिन चांदनी बिहारपुर क्षेत्र के कुबेरपुर में ट्रैक्टर हादसे में चंद्रावती जायसवाल की मौत हो गई। घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने बस्ती के बीच संचालित क्रेशर और गिट्टी लदे वाहनों की आवाजाही पर नाराजगी जताई। ग्रामीणों ने शव रखकर मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। विरोध के दौरान क्रेशर परिसर में आगजनी की घटना भी सामने आई।
लगातार दो दिनों में हुई इन मौतों ने बस्तियों के बीच भारी वाहनों की आवाजाही और सड़क सुरक्षा के इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आरटीओ, यातायात पुलिस और खनिज विभाग की जवाबदेही जरूरी
सड़क सुर
क्षा सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय जरूरी है। परिवहन विभाग को वाहनों के पंजीयन, दस्तावेजों और चालकों की पात्रता की जांच करनी चाहिए। यातायात पुलिस को नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर कार्रवाई करनी चाहिए। वहीं, खनिज विभाग को गिट्टी और रेत के स्रोत तथा खनिज परिवहन से संबंधित वैध अनुमति की जांच करनी चाहिए।
इसके अलावा स्थानीय प्रशासन को बस्तियों, स्कूलों, बाजारों और दुर्घटना संभावित मार्गों पर भारी वाहनों की आवाजाही से उत्पन्न खतरे का आकलन करना चाहिए। जरूरत के अनुसार निगरानी बढ़ाने और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई करने की आवश्यकता है।
हादसों के बाद नहीं, पहले हो कार्रवाई
सूरजपुर में दो दिनों के भीतर हुई दो मौतों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार विभाग कितने सक्रिय हैं। यदि वाहनों के दस्तावेजों, चालकों के लाइसेंस और परिवहन संबंधी नियमों की नियमित जांच हो, तो कई जोखिमों को कम किया जा सकता है।
अब जरूरत केवल हादसों के बाद कार्रवाई करने की नहीं, बल्कि पहले से प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने की है, ताकि सड़कों पर दौड़ रहे भारी वाहनों के कारण किसी और परिवार को अपने प्रियजन को न खोना पड़े।










