अम्बिकापुर / संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, सरगुजा, अंबिकापुर के हिंदी विभाग द्वारा हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत हिंदी दिवस समारोह का गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. राजेंद्र लकापाले ने की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि आचार्य दिग्विजय सिंह तोमर तथा विशिष्ट अतिथि संतोष दास एवं डॉ. नीलाभ कुमार उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक, अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की। अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति डॉ. राजेंद्र लाकपाले ने हिंदी दिवस की सार्थकता और हिंदी भाषा के व्यापक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विचार किसी भी अभिव्यक्ति का मूल आधार हैं और विचार सबसे पहले हमारे मन में जन्म लेते हैं। मनुष्य स्वाभाविक रूप से अपनी भाषा में सोचता है, जिससे उसका आत्मीय, सांस्कृतिक और भावनात्मक जुड़ाव होता है। उन्होंने मातृभाषा एवं हिंदी में चिंतन, लेखन तथा प्रभावी अभिव्यक्ति की प्रवृत्ति को निरंतर प्रोत्साहित करने की आवश्यकता बताई।
कुलपति ने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा, विचार-चेतना और अस्मिता की संवाहक है। उन्होंने भाषायी हीनभावना से मुक्त होकर अपनी भाषा के प्रति गौरवबोध विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने विद्यार्थियों से हिंदी को केवल एक विषय या औपचारिक भाषा के रूप में न देखकर ज्ञान, शोध, चिंतन और सृजन की भाषा के रूप में विकसित करने की अपील की।
उन्होंने हिंदी की संवैधानिक स्थिति, राजभाषा के रूप में उसकी भूमिका तथा भारतीय भाषायी परिदृश्य में उसके महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हिंदी का विकास केवल हिंदी भाषियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह भारतीय भाषायी और सांस्कृतिक समन्वय की व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा है। विश्वविद्यालयों को हिंदी को ज्ञान-विज्ञान, शोध एवं रचनात्मक अभिव्यक्ति के सशक्त केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य करना चाहिए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आचार्य दिग्विजय सिंह तोमर ने हिंदी की व्यापकता तथा भारतीय संस्कृति में उसकी भूमिका पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने अपनी स्वरचित कविता के माध्यम से कार्यक्रम को साहित्यिक गरिमा प्रदान की। विशिष्ट अतिथि संतोष दास ने स्वरचित गीतों की प्रस्तुति देकर उपस्थित श्रोताओं को भावविभोर किया। विशिष्ट वक्ता डॉ. नीलाभ कुमार ने औपनिवेशिक मानसिकता एवं भाषायी जड़ता के प्रभावों पर विचार रखते हुए भारतीय भाषाओं और सांस्कृतिक अस्मिता के संरक्षण की आवश्यकता रेखांकित की। उन्होंने हिंदी को राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता के लिए महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
कार्यक्रम में हिंदी के प्रचार-प्रसार, इसके अधिकाधिक प्रयोग तथा विद्यार्थियों में हिंदी के प्रति रुचि और रचनात्मक अभिव्यक्ति को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया। हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत आयोजित विभिन्न गतिविधियों ने विश्वविद्यालय परिवार में हिंदी के प्रति उत्साह और सहभागिता का वातावरण निर्मित किया।
विश्वविद्यालय परिवार की उत्साहपूर्ण सहभागिता के साथ हिंदी दिवस समारोह गरिमापूर्ण एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम ने हिंदी को चिंतन, ज्ञान, शोध, सृजन और अभिव्यक्ति की सशक्त भाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने के संकल्प को और मजबूत किया।










