बलरामपुर / प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सेवा भाव और पारंपरिक कारीगरों के सम्मान के संकल्प से प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना शुरू हुई है। यह योजना पीढ़ियों से चले आ रहे हुनर को आधुनिक तकनीक से जोड़ रही है। जिले के विकासखंड राजपुर के ग्राम आरा निवासी श्री गिरीश पाल इसका जीवंत उदाहरण हैं। योजना से मिले इलेक्ट्रॉनिक चाक ने उनके पारंपरिक व्यवसाय को नई गति दी है।
गिरीश पाल पारंपरिक रूप से मिट्टी के बर्तन बनाने का कार्य करते हैं। पहले वे साधारण चाक से बर्तन तैयार करते थे, जिसमें अधिक समय और कड़ी मेहनत लगती थी। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत उन्हें इलेक्ट्रॉनिक चाक उपलब्ध कराया गया। इससे बर्तन गढ़ने की प्रक्रिया सरल और सुविधाजनक हो गई है। अब वे कम समय और कम श्रम में अधिक बर्तन तैयार कर पा रहे हैं, जिससे उनकी कार्यक्षमता बढ़ी है।
आधुनिक उपकरण के सहारे गिरीश पाल अपने हुनर को पहले से अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा रहे हैं। उत्पादन में आई सुविधा ने उनकी आर्थिक स्थिति सुधारने की राह भी आसान की है। मिट्टी से जुड़ी पारंपरिक कला को तकनीक का संबल मिलने से उनके व्यवसाय में नई संभावनाएँ खुली हैं।
गिरीश पाल ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने गाँव के छोटे कारीगरों की जरूरतों को समझा है और विश्वकर्मा योजना के माध्यम से उनके हुनर को सम्मान दिया है। उन्होंने बताया कि आधुनिक चाक मिलने से उनके काम में काफी आसानी हुई है और उन्हें अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने का अवसर मिला है।
गिरीश पाल की कहानी दर्शाती है कि सेवा और समर्पण के भाव से बनी योजनाएँ जब गाँव के कारीगर तक पहुँचती हैं, तो पारंपरिक कौशल आधुनिक स्वरोजगार का मजबूत आधार बन जाता है।










